नरेश कद, कपूरथला

साल 1870 में बनाई गई कांजली वेटलैंड व पिकनिक स्पाट को विकसित करने की कई योजनाएं बनीं लेकिन तमाम योजनाओं का सरकारी फाइलों में ही सीमित होकर रह गई। जलकुंभी ने इस समय कांजली पिकनिक स्पाट का स्वरूप बिगाड़ रखा है। कभी कांजली वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों का झुंड देखा जाता था। अब गंदगी की वजह से प्रवासी पक्षियों ने कांजली से मुंह मोड़ लिया है। कांजली झील में पानी की बजाए चारो तरफ जलकुंभी ही दिखाई देता है।

बताते चलें कि कई सरकारें आई और गई लेकिन कांजली की हालात नहीं बदली। विभिन्न प्रोजेक्ट के नींव पत्थर रखे गए लगभग डेढ़ करोड़ खर्च भी कर दिया गया लेकिन दशकों बाद एक भी मुकम्मल नही हुआ। कांजली वेटलैंड व पिकनिक स्पाट को विकसित कर कपूरथला को एक पयर्टन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना दशकों से कई योजना चली आ रही है। संत बलबीर सिंह सीचेवाल की ओर से कार सेवकों की मदद से कांजली झील को साफ करने और बेई के किनारे सुंदर घाट बनाने के बावजूद जिला प्रशासन इस पिकनिक स्पाट को सहेजने में पूरी तरह नाकाम रहा है।

पूर्व डीजीपी केपीएस गिल ने

पंजाब के तत्कालीन डीजीपी केपीएस गिल द्वारा 16 जुलाई 1994 को कांजली में पर्यटकों के लिए बोट क्लब खोला गया था। इसके बाद 24 मार्च 1995 को तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर सतीश चंद्रा की ओर से कांजली की एक्सटेशन इंप्रूवमेंट एंड ब्यूटीफीकेशन का नींव पत्थर रखा गया। पूर्व डीसी ऊषा आर शर्मा की ओर से चार दिसंबर 1998 को कांजली को सुंदर बनाने वाले प्रोजेक्ट का नींवपत्थर डाला गया। नौ अक्तूबर 2006 को पूर्व टूरिजम व पशु पालन मंत्री जगमोहन सिंह कंग की ओर से कांजली वेटलैंड और पिकनिक स्पाट कांप्लेक्स का नींवपत्थर रखा गया। अभी तक जितने भी नींव पत्थर रखे गए वह सभी तो अपने स्थान पर कायम है लेकिन योजना आज तक कोई भी सिरे नही लग सकी है।

कांजली वेटलैंड व पिकनिक स्पाट में चिल्ड्रन पार्क बनाने, बच्चों के लिए छोटी रेलगाड़ी चलाने, होटल बनाने, डिजनी लैंड की तरह झूले, शिकारे व आधुनिक किश्ती को जल में उतारने के अलावा पानी से बिजली पैदा करने के सपने तक दिखाए गए लेकिन इनमें एक भी हकीकत नही बन सका। इन तमाम योजनाओं पर अभी तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हो गए लेकिन एक भी योजना का काम मुकम्मल नहीं हुआ।

कांजली में वर्तमान में योजना के नाम पर होटल के लिए बनी सिर्फ एक इमारत खड़ी है जिसे बने सालों बीत गए है। इमारत शुरू होने से पूर्व ही गिरने की कगार पर पहुंचती जा रही है।

लाखों खर्च कर पक्षियों के लिए बनाए गए तमाम आधुनिक घोसले दशकों से वीरान पड़े है। ना कोई झूला, ना कोई नाव। हर तरफ गंदगी से हाल बेहाल है। कांजली को विकसित करने के मद्देनजर कांजली डेवलेपमेंट सोसायटी का गठन हुआ था, लेकिन सोसायटी विकास करवाने में विफल रही है।

कांजली को सुंदर बनाया जाएगा : डीसी

डिप्टी कमिश्नर दीप्ति उप्पल का कहना है कि कांजली वेटलैंड व पिकनिक स्पाट के साथ साथ सरकार कपूरथला की तमाम ऐतिहासक इमारतों को भी टेक ओवर कर रही है। कांजली वेटलैंड और पिकनिक स्पाट का विकास करवाया जाएगा। कपूरथला को पर्यटन हब के तौर पर विकसित किया जाएगा।

Edited By: Jagran