जागरण संवाददाता, कपूरथला। हर व्यक्ति के जीवन में एक मोड़ आता है जब वह समझ पाता है कि उसकी जिदगी का उद्देश्य क्या है। ऐसा ही एक मोड़ सात साल पहले 44 वर्षीय इंद्रजीत कौर की जिदगी में भी आया तथा उन्होंने गणित और कंप्यूटर अध्यापक का काम छोड़कर योग प्रशिक्षक, रेकी गाइड और कांउसलर के रूप में अपनी पहचान बना ली।

शहर की कई संस्थाएं इंद्रजीत कौर की सेवाएं अपनी गुणवत्ता सुधारने के लिए ले रहे हैं। इंद्रजीत कौर अपनी मन की शांति के लिए शहर में विशेष बच्चों के लिए चल रहे चिराग ट्रेनिग सेंटर में बच्चों को निश्शुल्क काउंसलिग करती हैं।

इंद्रजीत कौर का कहना है कि उन्होंने अपना करियर जालंधर कैंट में स्थित विक्टर माडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में गणित और कंप्यूटर साइंस के शिक्षक के तौर पर शुरू किया था। बाद में डिप्स स्कूल में भी पढ़ाया तथा फाइनेंशियल सर्विस (यूनिमोनी एक्सचेंज) पंजाब में सीनियर आफिसर के रूप में काम भी किया।

पति का तबादला केरल हो गया। इसके बाद वह मुंबई चले गए। मुंबई में सांता क्रूज के एक स्कूल में बच्चों और वयस्कों के लिए 83 साल से चल रहे योगा सेंटर से एक वर्ष का योग शिक्षक प्रशिक्षण हासिल किया। अपने शरीर और शरीर में मौजूद चक्रों को अच्छे से समझा। चक्र चिकित्सा, योग, काउंसलिग और रेकी चिकित्सा के दोनो लेवल पास किए।

इंद्रजीत ने बताया कि उन्होंने मुंबई में वरिष्ठ नागरिकों, स्कूल के छात्रों, कारपोरेट कार्यालयों और किसी वेलनेस टूडियो में योग प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। कपूरथला आने के बाद कई संस्थानों से जुड़कर लोगों को योग का प्रशिक्षण देना शुरू किया।

उन्होंने निरंकारी भवन में भी योग सिखाना शुरू किया। अभी वह रागिनी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की काउंसलिग कर रही हैं और कई शिक्षण संस्थानों में योग सिखाने का काम कर रहीं है। हिंदू कन्या कालेज में हर शुक्रवार को छात्रा को मानसिक हालत सही रखने की तकनीक सिखा रहीं हैं।

योग के लिए अपने जुनून के बारे में बताते हुए इंद्रजीत कहती हैं कि वह भोजन के बिना रह सकती हैं लेकिन योग के बिना नहीं। अपनी भावी योजनाओं के बारे में बात करते हुए इंद्रजीत ने कहा कि शहर के हर व्यक्ति को योग के महत्व और मूल्य के बारे में पता होना चाहिए। इसी कोशिश में वह जुटी रहेंगी।

Edited By: Jagran