यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 21, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
शहर को वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने में करें सहयोग : दिव्यांशु भोला
राजीव गांधी इंक्लेव कालोनी में लोगो को पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक किया गया।

संवाद सहयोगी, कपूरथला : लक स्टोन वेलफेयर फाउंडरेशन की ओर से अधक्ष्य दिव्यांशु भोला की अगुआई में आइटीसी मिशन 'सुनहरा कल' के प्रोजेक्ट के तहत राजीव गांधी इंक्लेव कालोनी में लोगो को पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक किया गया। इस दौरान आइटीसी मिशन 'सुनहरा कल' के प्रोजेक्ट मैनेजर योगेश शर्मा अपनी टीम जिसमे सरिता, मनप्रीत कौर, प्रदीप कुमार, अंजू बाला आदि ने लोगो को ईको ब्रिक्स बनाने के लिए जागरूक किया।
इस दौरान दिव्यांशु भोला ने कहा कि प्रकृति और मनुष्य के बीच बहुत गहरा संबंध है। मनुष्य व पर्यावरण दोनों एक दूसरे के परस्पर पूरक हैं। उन्हें अलग करना कठिन है। पूरे सौर-मंडल में केवल हमारी पृथ्वी पर ही जीवन संभव है। परंतु यह तभी संभव रहेगा जब हम पर्यावरण को संरक्षित करेंगे। पर्यावरण अगर नष्ट हो जाएगा तो जीवन भी संभव नहीं होगा। भविष्य में धरती पर जीवन यापन करने के लिए हमें आज पर्यावरण को बचाना ही होगा।
दिव्यांशु भोला ने कहा कि पालीथिन और कोल्ड ड्रिंक्स की प्लास्टिक वाली बोतल दोनों ही पर्यावरण के लिए घातक हैं। प्लास्टिक मिट्टी में मिलकर जमीन की उर्वरक शक्ति को खत्म कर देती है। इसे आग लगाई जाए तो हवा बेहद प्रदूषित हो जाती है। पालीथिन व कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलों के प्रदूषण से बचाव के लिए लक स्टोन वेलफेयर फाउंडेशन ने ईको ब्रिक्स बनाने की एक अनूठी पहल की है। लक स्टोन वेलफेयर फाउंडरेशन की इस मुहिम से पर्यावरण तो बचेगा हीं साथ ही शहर पालीथिन व प्लास्टिक मुक्त बनाने मे मदद मिलेगी। इस मुहिम के तहत लोगों को ईको ब्रिक्स बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। दो ईको ब्रिक्स बनाने वाले व्यक्ति को लक स्टोन वेलफेयर फाउंडरेशन एक कपड़े का थैला देगा।
पार्को की सुंदरता से लेकर घर बनाने में हो रहा इस्तेमाल
दिव्यांशु भोला ने बताया कि जब बोतलों में पालीथिन को भरा जाता है तो यह ठोस हो जाती हैं। इन ईको ब्रिक को घर के निर्माण के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा पार्कों में ब्यूटीफिकेशन, बैठने के लिए स्टूल भी बनाए जा सकते हैं। मुहिम से युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसका मकसद पर्यावरण को बचाना है। जैसे ही स्कूल-कालेज खुलेंगे, उन तक इस मुहिम को पहुंचाया जाएगा, ताकि मुहिम घर-घर जाए और लोग पालीथिन का इस्तेमाल न करें।
लोग व्हाट्सअप ग्रुप में डालते हैं फोटो
दिव्यांशु भोला ने ने बताया कि बताया कि इसके लिए एक व्हाट्सअप ग्रुप बनाया गया है। जिसमें लोग अपनी बनाई इको ब्रिक्स के साथ फोटो डालते हैं। इस मुहिम से जुड़कर लोग अब तक आठ हजार वर्ग गज जमीन को प्रदूषित होने से बचा चुके हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि इस मुहिम से जुड़ें और शहर के साथ-साथ वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने में सहयोग करें।