मनीष शर्मा, जालंधर

देहात पुलिस में तैनात आइपीएस अधिकारी वत्सला गुप्ता व अंकुर गुप्ता का तबादला हो गया है। वत्सला गुप्ता की जगह नकोदर में नवनीत माहल को और अंकुर गुप्ता की जगह आदमपुर में हरिदर सिंह को डीएसपी लगाया गया है। जालंधर देहात पुलिस में यही दोनों आइपीएस अधिकारी थे। इनके तबादले के बाद अब पूरा देहात पीपीएस अधिकारियों के हवाले हो गया है। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए क‌र्फ्यू ड्यूटी के दौरान दोनों ने बाकी अफसरों के साथ अच्छी मशक्कत की थी लेकिन अचानक उनके तबादले से हर कोई हैरान है। देहात पुलिस से फील्ड में तैनात सिर्फ दो आइपीएस अधिकारियों को ही बदले जाने से कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। हालांकि हर कोई अभी पंजाब सरकार के इस रूख पर बोलने से बच रहा है। - वत्सला गुप्ता को मिला था सम्मान

नकोदर में करीब एक साल से एएसपी पद पर तैनात वत्सला गुप्ता ने कोरोना वायरस के दौरान उम्दा काम किया था। 2016 बैच की आइपीएस वत्सला गुप्ता ने क‌र्फ्यू को लेकर सिर्फ सख्ती ही नहीं की बल्कि मुश्किल घड़ी में लोगों की मदद का भी काम किया। उन्होंने पुलिस को जरूरतमंद व दानी लोगों के बीच का पुल बनाया और सब तक मदद पहुंचाई। इस काम के लिए उन्हें डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस की ओर से ऑनर फॉर इग्जेंपलरी सेवा टू सोसायटी का भी सम्मान मिला था। तबादले के बाद वत्सला गुप्ता ने कहा कि उन्हें नकोदर में काफी कुछ सीखने को मिला। यहां लोगों से अच्छा सहयोग मिला, तभी कोरोना संक्रमण रोकने को लगे क‌र्फ्यू को कामयाब कर पाए। इसी तरह जरूरतमंदों की मदद के लिए भी लोग आगे आए और सबने एक साथ डटकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ी। उन्होंने नकोदर के लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि मुश्किल घड़ी में सबका एक-दूसरे को सहयोग जरूर कामयाबी दिलाता है। - बड़े व आइपीएस अफसरों में तबादले की चर्चा!

आइपीएस वत्सला गुप्ता व अंकुर गुप्ता को तबादले के बाद अभी तक कहीं तैनाती नहीं दी गई है। ऐसे में पुलिस अफसरों के बीच चर्चा है कि पुलिस में डीएसपी ही नहीं बल्कि उससे बड़े स्तर पर भी फेरबदल हो सकता है। खासकर, पुलिस कमिश्नरेट व जालंधर देहात पुलिस में बड़ी कुर्सियों पर बैठे पुलिस अफसर भी इसके बारे में कयास लगाने में जुटे हुए हैं। साधारण हालात में सरकार तबादले करती ही है लेकिन अभी कोरोना वायरस का खतरा नहीं टला, फिर भी प्रमुख पदों पर तैनात अफसरों के तबादले हो रहे हैं। इसके अलावा अब सरकार लगातार अवैध शराब तस्करी रोकने का भी पुलिस अफसरों पर दबाव बनाए हुए है। हालांकि देहात पुलिस ने कई बड़ी रिकवरी की हैं लेकिन शहर में अभी तक कोई बड़ा गिरोह या ज्यादा रिकवरी नहीं हुई है। क‌र्फ्यू के दिनों में पुलिस को भले कुछ अच्छी कामयाबी मिली लेकिन अब सरकार के सख्त आदेशों के बावजूद पुलिस थाने एक-दो पेटी तक सिमट चुके हैं। ऐसे में कई अफसरों को डर सता रहा है कि कहीं अवैध तस्करी को आधार बना शराब की कम बिक्री का ठीकरा सरकार उनके सिर न फोड़ दे। लिस्ट निकलते ही अफसर कुर्सी सलामत रखने और आगे के हालात पता करने के लिए चंडीगढ़ हेडक्वार्टर में अपने परिचितों को फोन करने में जुटे हैं।

Posted By: Jagran

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