जालंधर [सुक्रांत]। सीटी इंस्टीट्यूट से पकड़े गए कश्मीरी आतंकियों से पूछताछ में पता चला है कि जालंधर की एक कारोबारी महिला द्वारा उन्हें पैसे पहुंचाए जाते थे। सुरक्षा एजेंसियों ने पूछताछ के लिए महिला को हिरासत में ले लिया है। इस्टीट्यूट के हॉस्टल से पकड़े गए कश्मीरी छात्रों यासिर रफीक बट्ट, मोहम्मद इदरीश व जाहिद गुलजार के अलावा जम्मू कश्मीर से गिरफ्तार सोहेल से शनिवार को भी एनआइए व पुलिस की टीमें घंटों पूछताछ करती रहीं।

दूसरी तरफ जालंधर भेजी गई दूसरी एके-56 पुलिस को अभी तक नहीं मिली है। पुलिस को आशंका है कि यह जालंधर, अमृतसर, लुधियाना या गुरदासपुर में हो सकती है। इन शहरों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। जांच में सामने आया है कि सोहेल ने बट्ट के साथ साथ दूसरे शहरों में रहने वाले आतंकी संगठन अंसार-गजावत-उल-हिंद के सक्रिय सदस्यों से भी संपर्क कर उनको हथियार और विस्फोटक सामग्री उठाने के लिए कहा था। हालांकि इस बारे में पुलिस की पूछताछ को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा लेकिन पता चला है कि खुफिया एजेंसियों ने जालंधर के साथ-साथ अमृतसर, लुधियाना और गुरदासपुर पर भी फोकस किया है।

जांच में यह भी पता चला है कि जो लोग इस संगठन के लिए काम कर रहे हैं वे इन शहरों के किसी न किसी शिक्षण संस्थान में पढ़ रहे हैं या पढ़ाई करके किसी और काम पर लगे हुए हैं। पुलिस इन शहरों में रहने वाले जम्मू कश्मीर के छात्रों के अलावा उन लोगों की लिस्ट भी तैयार कर रही है जो इन लोगों के संपर्क में थे।

महिला का कारोबार दिल्ली से श्रीनगर तक

सीटी इंस्टीट्यूट में रह रहे कश्मीरी छात्रों को फंडिंग करने वाली महिला का कारोबार दिल्ली से लेकर श्रीनगर तक है। जहां पर इदरीश रहता था वहां पर उस महिला के पास काम करने वाले लोग भी रहते थे। उन्हीं लोगों के जरिए बट्ट के साथियों ने महिला से संपर्क किया और फिर पैसा पहुंचाने के लिए तैयार किया। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ कि उक्त महिला को यह पता था या नहीं कि जो पैसे वह जालंधर में पहुंचा रही है वह आतंकियों के लिए है। यह भी माना जा रहा है कि उस महिला को बिजनेस के नाम पर पैसे जालंधर में किसी के हाथ में पकड़ाने के लिए दिए जाते हों। यह भी जांच की जा रही है कि महिला के साथ-साथ और कौन-कौन लोग थे जो वहां से पैसा लाकर बट्ट व साथियों की मदद कर रहे थे।

आतंकियों के थे कोड वर्ड, राज खोलने में जुटी पुलिस

सोहेल की गिरफ्तारी के बाद यह भी पता चला है कि श्रीनगर से जालंधर में अपना संदेश पहुंचाने के लिए सीधे शब्दों में मैसेज नहीं बल्कि कोड वर्ड में दिया जाता था। अभी तक कुछ कोड वर्ड पुलिस ने ढूंढने में कामयाबी हासिल की है लेकिन उनके राज खोलने बाकी हैं। यह भी पता चला है कि यह कोड वर्ड श्रीनगर से चलने के बाद एक शहर में जाता तो दूसरे शहर तक पहुंचते पहुंचते बदल जाता था। ऐसे में पुलिस के सामने कोड वर्ड की चाबी ढूंढ पाना काफी चुनौती भरा हो सकता है।

जल्द करेंगे नेटवर्क ध्वस्त

पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर का कहना है कि पूरे मामले में गहनता से जांच की जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर अभी कुछ नहीं बोला जा सकता। पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

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Posted By: Kamlesh Bhatt