मनुपाल शर्मा, जालंधर : पड़ोसी देशों से महंगी कीमत, पड़ोसी राज्यों से ऊंची टैक्स की दर के बाद अब टैक्स की दर को लेकर तेल कंपनियों की मनमर्जी उपभोक्ताओं को महंगी साबित हो रही है। सरकारी एवं निजी तेल कंपनियों की सर्विस स्टेशन लाइसेंसिंग फीस (एसएसएलएफ) की दर का भारी अंतर ही हैरान कर देने वाला है। खास यह है कि लाइसेंसिंग फीस सरकार को अदा की जाती है और उसमें भी तेल कंपनिया मनमर्जी कर रही है। सरकारी एवं निजी तेल कंपनियों की एसएसएलएफ में ही 10 फीसद का भारी अंतर है। एक ही जिले में दो विभिन्न (सरकारी एवं निजी) तेल कंपनियों की एसएसएलएफ में अंतर देखने को मिल रहा है। आकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि जिला कपूरथला में इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) एसएसएलएफ के लिए 14 फीसद (सेंट्रल टैक्स) एवं 14 फीसद (स्टेट टैक्स) कुल 28 फीसद वसूल रहा है। इसके विपरीत रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की तरफ से जिला कपूरथला में ही 9 फीसद (सेंट्रल टैक्स) एवं 9 फीसद (स्टेट टैक्स) कुल 18 फीसद वसूल रहा है। इस बारे में पैट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन, पंजाब के प्रवक्ता मौंटी गुरमीत सहगल ने कहा कि सरकारी और निजी तेल कंपनियों के एसएसएलएफ टैक्स प्रणाली में 10 फीसद का अंतर बड़ी खरीद में बड़ा अंतर डालता है। एसएसएलएफ के 10 फीसद के अंतर से प्रति लीटर तेल की कीमत में 4 पैसे प्रति लीटर का ही अंतर आता है। यह बिलकुल ठीक है कि जब हजारों लीटर तेल की बिक्री होती है तो कीमत में भारी अंतर होगा। उन्होंने कहा कि इसे तो सरकार के साथ ही मनमर्जी करना कहा जा सकता है। इसकी गहन जाच की जानी चाहिए। इस बारे में इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के डीजीएम अतुल गुप्ता ने कहा कि एसएसएलएफ के लिए टैक्स की दर में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बारे वाणिज्य विभाग से पता लगवाया जाएगा।

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