जगदीश कुमार, जालंधर : मिलावटखोरों के खिलाफ प्रशासन ने कमर कस ली है। हालांकि अभी मिलावटखोरी थम नहीं रही है, लेकिन मिलावटखोरी के मामलों को एडीसी जसबीर ¨सह की अदालत में तेजी के साथ निपटारा किया जा रहा है। 5 से लेकर 50 हजार रुपये तक जुर्माना किया जा रहा है। एडीसी जसबीर ¨सह का कहना है कि लोगों की ¨जदगी के साथ किसी को खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। अभियान लगातार जारी रहेगा जो बाज नहीं आएंगे, उनके खिलाफ जुर्माने के अलावा भी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

जिला सेहत अधिकारी डॉ. बलविंदर ¨सह का कहना है कि विभाग की ओर से खाद्य पदार्थो के सैंपल भरकर उनकी रिपोर्ट के आधार पर एडीसी और सीजेएम की अदालत में केस फाइल किए जाते हैं। फैसले के बाद मिलावटखोर जुर्माना भुगतकर दोबारा पुरानी राह पर चलने लगते हैं। उन्होंने कहा कि कानून में सख्ती करने से मिलावटखोरों पर शिकंजा कसा जा सकता है। फिलहाल मिलावटखोर बार-बार जुर्म कर जुर्माना भुगत रहे हैं। एक्ट में इनका लाइसेंस रद करने का भी प्रावधान नहीं है।

पिछले साल सैंपल भरे

माह सेंपल केस लगाएं

2017-2018 915 290 (फेल)

मार्च 2018 84 52

अप्रैल 2018 78 11

मई 2018 83 25

साल 2017-18 में 194 मिलावटखोरों के खिलाफ केस लगाए और 152 को सजा सुनाई।

साल 2018 में एडीसी की अदालत में हुए फैसले

माह केस फैसला हुए

जनवरी 23 11

फरवरी 30 16

मार्च 66 59

अप्रैल 20 15

मई 30 20

एडीसी ने 5 से लेकर 50 हजार रुपये तक जुर्माना किया।

50-50 हजार रुपये हुआ जुर्माना

जालंधर के एक होटल को दही व पनीर का सैंपल फेल होने पर एडीसी ने 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। फाजिल्का की एक कंपनी के टैंकर से खाद्य तेल का सैंपल भरा। उसके फेल होने पर 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा हुई थी।

भविष्य में कसा जाएगा मिलावटखोरों पर शिकंजा : एडीसी

एडीसी जसबीर ¨सह का कहना है कि मिशन तंदुरुस्त पंजाब के तहत खाद्य पदार्थो में मिलावट करने वालों पर पूरी तरह से शिकंजा कसा जा रहा है। तेजी से मामलों की सुनवाई की जा रही है। फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड एक्ट के तहत गहन जांच के बाद सजा सुनाई जा रही है और किसी से भी रियात नही बरती जाती।

Posted By: Jagran

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