जागरण संवाददाता, जालंधर: सूबे में एसएसए/रमसा/सीएसएस उर्दू अध्यापकों के वेतन में 65 फीसद कटौती कर महज 15000 रुपये के वेतन पर सेवाएं रेगुलर करने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। इन संगठनों के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पंजाब सरकार ने अपने फैसले को बदल कर पूरे वेतन समेत सेवाएं शिक्षा विभाग के अधीन रेगुलर करने का फैसला न लिया तो 7 अक्टूबर से पटियाला में पक्का धरना लगा दिया जाएगा।

गौरतलब है कि पंजाब कैबिनेट ने तीन अक्टूबर को उपरोक्त फैसले पर मुहर लगाई है। सरकार के इस फैसले के आते ही राज्यभर में अध्यापकों में गुस्से की लहर दौड़ गई व गुस्सा भी ऐसा फूटा कि तीन अक्तूबर को ही अध्यापकों ने विधायकों, मंत्रियों व कांग्रेस हलका इंचार्जों के घरों के आगे धरना लगाकर रोष प्रकट किया। संघर्ष को जारी रखते राज्य स्तरीय आह्वान पर एसएसए रमसा अध्यापक यूनियन जालंधर के बैनर तले जालंधर में एकत्रित हुए एसएसए रमसा अध्यापकों ने शुक्रवार को सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

जिला प्रधान गुरप्रीत परमार व जिला महासचिव तिलक राज की अगुआई में सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली गई। यूनियन ने कहा कि एक तरफ पंजाब कैबिनेट मेहनती अध्यापकों के मेहनताने को दबा रही है, वहीं नाजायज ढंग से कॉलोनियों का निर्माण कर अरबों रुपये कमाने वाले कॉलोनाइजरों का करोड़ों रुपये जुर्माना माफ कर रही है। इससे साबित होता है कि सरकार पूंजीपतियों की तिजौरियां भरने का काम कर रही है।

इस मौके पर मुनीष, जस¨वदर, रु¨पदर, प्रशांत गौतम, रमन, सरबजीत, शिवदयाल, रवि कुमार, मैडम किरण, अनीता, हरकमल, सीमा, परवीन व अन्य अध्यापक मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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