प्रदीप कुमार सिंह, कोटकपूरा (फरीदकोट)। बीबी परमजीत कौर गुलशन के बाद पद्मश्री विक्रमजीत सिंह साहनी कोटकपूरा से जुड़े दूसरे शख्स हैं, जिन्हें राज्यसभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करने का गौरव हासिल होगा। आम आदमी पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। कोटकपूरा से लगभग चार दशक पहले साहनी का परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया था। दिल्ली में रहते हुए वह एक सफल उद्योगपति बने।

इसके साथ वह समाजसेवा के क्षेत्र में लगातार काम करते रहे। इसे देखते हुए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। कोरोना काल में सेवा और अफगानिस्तान में फंसे लोगों को निकालने पर उनकी काफी सराहना हुई थी। संसद में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा लगाने में भी उनकी अहम भूमिका रही।

साहनी के राज्यसभा सदस्य के रूप में नामित होने से कोटकपूरा व फरीदकोट के लोगों में खुशी की लहर है। उनके शिक्षक रहे सरकारी बृजेंद्रा कालेज फरीदकोट के प्रोफेसर दलबीर सिंह ने बताया कि साहनी की प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक की शिक्षा कोटकपूरा में ही हुई है। विक्रमजीत सिंह साहनी को कोटकपूरा के ढोढा चौक के पास छोटी सी कपड़े की दुकान चलाने वाले गुरचरण सिंह साहनी ने गोद लिया था। सीनियर सेकंडरी पास करने के बाद साहनी ने सरकारी बृजेंद्रा कालेज से स्नातक किया और फिर पंजाबी यूनिर्वसिटी पटियाला से एमबीए किया।

बचपन से ही गायकी का शौक

प्रोफेसर दलबीर सिंह ने बताया कि साहनी को बचपन से ही गायकी का शौक था। कालेज में वह गुरबाणी का पाठ करते थे। इसके अलावा स्टेज पर भी अच्छा परफार्म करते थे। दिल्ली में कारोबार विकसित करने के साथ-साथ साहनी ने समाजसेवा व धार्मिक गायकी के माध्यम से अपनी अलग पहचान कायम की। खालसा पंथ की स्थापना के 300 साल पूरे होने पर कालेज में करवाए गए समारोह में विक्रमजीत सिंह साहनी विशेष रूप से आए थे। उन्होंने कालेज में एक कंप्यूटर लैब स्थापित करवाने का वादा भी किया था। प्रो. दलबीर के अनुसार पढ़ाई पूरी करने के बाद साहनी ने कुछ साल तक कोल इंडिया लिमिटेड में नौकरी की और उसके बाद परिवार के साथ मिलकर दिल्ली में अपना बिजनेस शुरू कर लिया। अब वह सफल उद्योगपति हैं। वह विश्व पंजाबी संगठन के अध्यक्ष भी हैं। साहनी विकलांग जरूरतमंद युवाओं के लिए निशुल्क कौशल विकास केंद्र चलाने वाली सन फाउंडेशन के संस्थापक भी हैं।

2000 आक्सीजन सिलेंडर, एक लाख लोगों के लिए लंगर

साहनी ने कोरोना काल में मोबाइल परीक्षण क्लीनिक, 2000 आक्सीजन सिलेंडर व रोजाना एक लाख लोगों के लिए लंगर का प्रबंध किया। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे के दौरान वहां फंसे अफगान ¨हदू व सिख परिवारों को चार्टर्ड विमान भेजकर वहां से निकाला और उनके बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा व वहां से आए परिवारों के पुनर्वास के लिए भी प्रयास किए। एसजीपीसी ने उन्हें अनमोल सिख रतन पुरस्कार से भी नवाजा है।

Edited By: Vinay Kumar