जागरण संवाददाता, जालंधर

राज्य सरकार ने जिला परिषद के बैनर तले देहाती डिस्पेंसरियों में सेवाएं मुहैया करवा रहे रूरल मेडिकल अफसरों (आरएमओ) की मांगें न पूरी तो वो 25 अप्रैल से कोरोना ड्यूटियों का बायकाट करेंगे। इसको लेकर फेडरेशन आफ एसोसिएशन आफ रूरल मेडिकल आफिसर्स आफ पंजाब ने ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को ज्ञापन भी दिया है।

फेडरेशन आफ एसोसिएशन आफ रूरल मेडिकल आफिसर्स आफ पंजाब के प्रधान डा. जेपी नरूला ने बताया कि जिला परिषद के बैनर तले राज्य में 1186 ग्रामीण डिस्पेंसरियों में ठेके पर सेवाएं शुरू की थी। 2011 में राज्य सरकार ने उनकी सेवाएं रेगुलर कर दी थी। साल 2015 में वो डायनामिक एश्योरडस कैरियर प्रोग्रेशन स्कीम (डीएसीपी) के लिए योग्य हो गए। पिछले छह साल से डाक्टर इस स्कीम को लागू करने की मांग को लेकर विभाग के आला अधिकारियों व मंत्री से गुहार लगा रहे हैं। सभी ने आश्वासन दिया, परंतु नतीजे शून्य रहे। पिछले एक साल से सरकारी डिस्पेंसरियों में काम बंदकर आरएमओ कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। आरएमओ सरकारी अस्पतालों में कोरोना वार्ड, आइसीयू, लोगों के सैंपल लेने और रिपोर्टे तैयार कर विभाग को पहुंचाने में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। इसके बावजूद भी राज्य सरकार उनकी मांगों को दरकिनार कर रही है। मंत्री तृप्त राजिदर सिंह बाजवा मानते हैं कि इस मामले को लेकर एसोसिएशन के साथ कई बार बैठकें हुई हैं। उन्होंने डीएसीपी को लेकर प्रक्रिया भी शुरू की थी। उनका कहना है कि मामले को लेकर मुख्यमंत्री से बात करेंगे।

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