जागरण संवाददाता, जालंधर : प्रभु श्रीराम व रावण के बीच चल रहे युद्ध में हर कोई रावण का वध का मंचन देखने को बेताब था। युद्ध से पहले एक तरफ रावण के साथ राक्षसों की सेना तो वहीं दूसरी तरफ प्रभु श्रीराम के साथ हनुमान, सुग्रीव व वानरों की सेना। दैवीय शक्तियों से परिपूर्ण प्रभु श्री राम की सेना ने दानवों की सेना के दांत खट्टे किए। इस बीच जैसे ही प्रभु श्री राम व रावण आमने-सामने हुए तो पंडाल में बैठे राम भक्तों में उत्सुकता बढ़ गई। फिर शुरू हुआ राम व रावण का ऐतिहासिक युद्ध। मौका था, नवयुवक रामलीला कमेटी द्वारा रामलीला के अंतिम दिन करवाए गए राम-रावण युद्ध व रावण वध के मंचन का। सात दशक से रामलीला का मंचन करवा रही संस्था द्वारा रामलीला का आगाज मंच पर धरती पूजन व प्रभु श्रीराम की महिमा के उच्चारण के साथ हुआ। इस दौरान युद्ध का मंचन राम भक्तों के लिए उत्साहित करने वाला रहा। प्रभु श्रीराम रावण पर लगातार वार करते रहे लेकिन रावण का एक सिर काटने के बाद उसी जगह पर दूसरा सिर लग जा रहा था। आखिरकार रावण के भाई विभीषण ने राज खोला। इस दौरान विभीषण ने कहा कि रावण का जीवन उसकी नाभि में है। प्रभु ने रावण की नाभि में बाण मार कर रावण का वध कर दिया। इसके साथ पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राम भक्तों ने जय श्री राम के जयघोष के साथ रामलीला का समापन किया। इस मौके पर अश्वनी चावला, नीटा काला, एसएस वालिया, रमेश शारदा, नरेश शारदा, रवि प्रकाश, हैप्पी सिंह, गौरव जौली सहित सदस्य मौजूद रहे।

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