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    पंजाब में सीनियर सहायक का अनोखा कारनामा, बेटे को कागजों में भतीजा दिखा दिलाई सरकारी नौकरी; चंडीगढ़ तक जुड़े घपले के तार

    By Vikas KumarEdited By:
    Updated: Wed, 17 Mar 2021 10:08 AM (IST)

    तरतारन के मीयांविंड में छह दर्जा चार कर्मियों को फर्जी मृत घोषित करके फर्जी आश्रितों को नौकरी देने के मामले में घपले की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। इस फर्जीवाड़े के गिरोह के मुखिया सीएचसी मीयांविंड में तैनात सीनियर सहायक हरदविंदर सिंह है।

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    तरनतारन में छह दर्जा चार कर्मियों को फर्जी मृत घोषित करके फर्जी आश्रितों को नौकरी दी गई।

    तरनतारन, [धर्मबीर सिंह मल्हार]। कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) मीयांविंड में छह दर्जा चार कर्मियों को फर्जी मृत घोषित करके फर्जी आश्रितों को नौकरी देने के मामले में घपले की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े के गिरोह के मुखिया सीएचसी मीयांविंड में तैनात सीनियर सहायक हरदविंदर सिंह ने अपने बेटे को कागजों में भतीजा दर्शाकर उसे भी नौकरी दिलवाई। बाद में सिविल सर्जन कार्यालय से इस मामले का आधा रिकार्ड भी गायब कर दिया गया। इस मामले के तार चंडीगढ़ कार्यालय तक जुड़े पाए गए हैं।

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    हरविंदर ने अपने साथी रविंदरपाल सिंह की मिलीभगत से सेहत विभाग को चूना लगाया है। जांच में सीनियर मेडिकल अधिकारी (एसएमओ) डा. नवीन खुंगर का नाम भी सामने आया है। सेहत विभाग के सूत्रों की मानें तो सीनियर सहायक हरदविंदर सिंह खडूर साहिब हलके के गांव लालपुरा का रहने वाला है। उसने जिन छह दर्जाचार कर्मियों को मृत घोषित किया, उनके डेथ सर्टिफिकेट फर्जी तैयार किए, फर्जी आश्रित बनाने के लिए फर्जी हलफिया बयान बनाए थे। सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात सीनियर सहायक जसविंदर सिंह ने अपनी पोस्टिंग सियासी सिफारिश में यहां करवाई थी ताकि नौकरी के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जा सके। जांच में यह भी सामने आया कि सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात आरोपित सुपरिंटेंडेंट दलजीत सिंह की मिलीभगत से तीन फाइलों को गायब कर दिया गया। यह उन तीन लोगों की फाइलें है, जिनको फर्जी आश्रित बनाकर दर्जाचार कर्मी की नौकरी दिलाई गई।

    खजाना विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में

    रिपोर्ट के मुताबिक लीव एंड कैशमेंट से संबंधित 7.48 लाख की राशि के अलावा मरने वाले फर्जी दर्जा चार कर्मियों के नाम पर एक-एक लाख की राशि के छह चेक खडूर साहिब स्थित सेंट्रल बैंक से कैश करवाए गए। इसमें खजाना विभाग की मिलीभगत भी सामने आई है। मीयांविंड में तैनात विभिन्न कर्मियों की ग्रेचुअटी के करीब 32 लाख रुपये का गबन भी सामने आ रहा है। अब जिस कर्मी के साथ ये गबन हुआ, उससे बयान दर्ज न करवाने के लिए लगातार दबाया जा रहा है।

    प्रैक्टिशनरों से वसूली करने की शिकायत भी हुई थी

    सीएचसी मीयांविंड में तैनात एसएमओ डा. नवीन खुंगर व सीनियर सहायक हरदविंदर सिंह लालपुरा की शिकायत सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू को भेजी गई थी। आरोप था कि अस्पताल का अमला गांवों में प्रैक्टिस करने वाले प्रैक्टिशनरों से वसूली करते हैं।

    चंडीगढ़ के बाबुओं की भी मिलीभगत

    नौकरी में फर्जीवाड़े के लिए सिविल सर्जन कार्यालय से फार्मेलिटी पूरी करवाने के बाद सेहत और परिवार भलाई विभाग के चंडीगढ़ कार्यालय के बाबुओं से भी इस गिरोह ने नाता जोड़ रखा था। इन बाबुओं की भी इसमेें मिलीभगत की जानकारी सामने आई है। साथ ही उनकी तरफ से कमीशन लेकर फर्जी आश्रितों के परिवारों को एक-एक लाख की राशि जारी करवाई गई। इतना नहीं इन लोगों ने लीव एंड कैशमेंट की 7.48 लाख की राशि भी जारी करवाने में अहम भूमिका निभाई थी।

    सिविल सर्जन की बदौलत उजागर हुआ मामला: विधायक डा. अग्निहोत्री

    विधायक डा. धर्मबीर अग्निहोत्री का कहना है कि सिविल सर्जन डा. रोहित मेहता ने अपनी जांच रिपोर्ट सेहत विभाग को सौंप दी है। इस मामले के तार चंडीगढ़ तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इसकी जांच के लिए सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू से बात की है ताकि पता चल सके कि इन लोगों ने सेहत विभाग को कितना चूना लगाया है।

    बड़े बाबुओं की मिलीभगत की जांच के लिए बनाई एसआइटी: मंत्री सिद्धू

    सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू कहते हैैं कि सीएचसी मीयांविंड में नौकरी के फर्जीवाड़े मामले की जांच पूरी हो चुकी है। इस रिपोर्ट के आधार पर मीयांविंड के एसएमओ डा. नवीन खुंगर, सीनियर सहायक हरदविंदर सिंह, रविंदरपाल सिंह के अलावा सिविल सर्जन कार्यालय के सुपरिंटेंडेंट दलजीत सिंह, सीनियर सहायक जसविंदर सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। पूर्व सिविल सर्जन डा. अनूप कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई लिए कहा गया है। इस मामले से संबंधित चंडीगढ़ कार्यालय से जो तार जुड़े है, उसकी अलग तौर पर जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई गई है।