मनोज त्रिपाठी, जालंधर। पंजाब की सियासत में बड़े राजनीतिक घरानों का दबदबा लंबे समय है। अब बड़े नेताओं के बेटे भी पिता के नक्शेकदम पर चल पड़े हैं। एक तरफ जहां पंजाब के आम युवाओं ने चुनाव से दूरी बना रखी है तो वहीं सियासी परिवारों से ताल्लुक रखने वाले युवा चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। मतदाताओं की लिस्ट पर नजर डालें तो इस बार पहली बार मतदान के लिए तैयार हो चुके साढ़े नौ लाख युवाओं में से साढ़े छह लाख ने वोट बनाने के लिए भी आवेदन नहीं किया है। दूसरी ओर सियासी परिवारों के लाल इस चुनाव को एक मौका मानकर अपना करियर बनाने आगे आ चुके हैं।

इस बार पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार व दिग्गज कांग्रेसी भरत इंद्र सिंह चाहल के बेटे बिक्रम इंद्र सिंह चाहल सनौर विधानसभा हलके से पंजाब लोक कांग्रेस की टिकट पर उम्मीदवार हैं। बिक्रम कांग्रेस से चुनाव लड़ने की तैयारी पिछले चुनाव से ही कर रहे थे। उन्होंने इस सीट से पिछले चुनाव में भी कांग्रेस से टिकट हासिल करने की कोशिश की थी। 

पटियाला से मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा और पूर्व मंत्री सुरजीत के बेटे मैदान में

पटियाला देहात से मौजूदा केबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा के बेटे मोहित मोहिंदरा कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। मोहित पिछले चुनाव में भी टिकट चाहते थे लेकिन इस बार कांग्रेस ने पिता की वफादारी व कैप्टन की खिलाफत के चलते उन्हें टिकट से नवाजा है। पटियाला सिटी से आम आदमी पार्टी के नेता व पूर्व मंत्री रहे सुरजीत सिंह कोहली के पुत्र अजीत सिंह कोहली चुनावी मैदान में हैं। सुरजीत पूर्व मेयर भी रह चुके हैं। अब वे राजनीति से संन्यास की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने समय रहते अपने बेटे को आम आदमी पार्टी से चुनाव मैदान में उतरवा दिया है।

डिप्टी सीएम रंधावा के सामने पूर्व मंत्री निर्मल सिंह काहलों के बेटे

डेरा बाबा नानक से अकाली दल के पूर्व मंत्री रहे निर्मल सिंह काहलों के पुत्र रविकरण सिंह काहलों चुनावी मैदान में हैं। रवि पिछले पांच सालों से सियासत में आने को लेकर जोर आजमाइश में लगे हुए थे। इस बार अकाली दल से उनका नंबर लग गया है। हालांकि उनकी लड़ाई डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा से है। अगर रविकरण रंधावा को हरा ले जाते हैं तो यह उनकी बड़ी जीत मानी जाएगी।

बठिंडा देहात में सवेरा सिंह ने पिता की विरासत संभाली

बठिंडा देहात से पूर्व विधायक मक्खन सिंह के बेटे सवेरा सिंह पंजाब लोक कांग्रेस पार्टी से चुनावी मैदान में हैं। मक्खन सिंह अब राजनीति से किनारा कर रहे हैं तो समय रहते उनकी विरासत को संभालने के लिए सवेरा सिंह चुनावी मैदान में आ चुके हैं। बठिंडा की सियासत में सवेरा सिंह कितना उलटफेर कर पाएंगे तो यह चुनावी परिणाम ही बताएंगे।

सुल्तानपुर लोधीः कांग्रेस की टिकट नहीं मिली तो राणा गुरजीत ने बेटे को निर्दलीय उतारा

सबसे रोचक लड़ाई वाली सीटों में कपूरथला की सुल्तानपुर लोधी की सीट शामिल हो चुकी हैं। यहां कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह के बेटे राणा इंद्रप्रताप सिंह कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण कांग्रेस के ही उम्मीदवार नवतेज सिंह चीमा के खिलाफ आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतर आए हैं। राणा को बेटे के इस फैसले व अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी नेताओं की मुखालफत का सामना भी करना पड़ रहा है। यह मामला कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रधान के दरबार तक भी पहुंच चुका है लेकिन राणा बेटे को चुनाव जिताने के लिए खुद भी पार्टी की नीतियों को किनारे करके उसके चुनावी प्रचार की कमान संभाल चुके हैं।

वह अपना विरोध करने वाले कांग्रेसी सुखपाल सिंह खैहरा, नवतेज सिंह चीमा, अवतार हैनरी जैसे दिग्गजों के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। अगर राणा इंद्र यह चुनाव जीतते हैं तो यह बड़ा उलटफेर साबित होगा और कपूरथला से सटी हुई सुल्तानपुर लोधी सीट कहीं न कहीं बाप-बेटे की पड़ोस की सीटें हो जाएंगी, जहां पर दो विधायक पिता-पुत्र के रूप में अपने-अपने हलकों की नुमाइंदगी करेंगे।

लंबी और धर्मकोट से भी बेटों को टिकट

लंबी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे जगपाल सिंह आबुल खुराना पूर्व मंत्री गुरनाम सिंह आबुल खुराना के बेटे हैं। कांग्रेस ने इन्हें पिता की मृत्यु के बाद चुनावी मैदान में उनकी विरासत को आगे बढ़ाने व इस हलके से बादल परिवार को टक्कर देने के लिए युवा उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है। धर्मकोट से एसजीपीसी सदस्य कुलदीप ढोंस के बेटे लाडी ढोंस चुनावी मैदान में हैं। आम आदमी पार्टी ने इन्हें पिता की सियासत को आगे बढ़ाने का मौका दिया है। हालांकि पिता पंथक राजनीति करते रहे हैं बेटा उनकी विचारधारा से अलग हटकर आप के साथ मैदान में आया है।

कांग्रेसी सांसद अमर सिंह का बेटा कामिल अमर सिंह लुधियाना की रायकोट सीट से चुनावी मैदान में है। कांग्रेस की टिकट पर तमाम विरोध के बावजूद पार्टी ने इन्हें उम्मीदवार बनाया है। रायकोट की सीट से पिछले पांच सालों से चुनाव लड़ने की कवायद में जुटे कामिल को इस बार पार्टी ने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का मौका दिया है। अमर सिंह प्रशासनिक अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद सियासत में आए थे।

सांसद चौधरी संतोख सिंह के बेटे विक्रमजीत फिल्लौर से मैदान में

जालंधर की फिल्लौर विधानसभा सीट से कांग्रेसी सांसद चौधरी संतोख सिंह के बेटे विक्रमजीत सिंह चौधरी कांग्रेस की टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। विक्रमजीत सिंह चौधरी इससे पहले पिछला चुनाव हार चुके हैं। इस बार पार्टी ने फिर उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। विक्रम चौधरी परिवार तीसरी पीढ़ी से आते हैं जो परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने की कवायद में जुटी हुई है।

सुनील जाखड़ और सुरजीत धीमान के भतीजे भी चुनावी मैदान में 

अबोहर से कांग्रेस के दिग्गज नेता सुनील जाखड़ का भतीजे संदीप जाखड़ कांग्रेस की टिकट पर परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए चुनावी मैदान में है। कभी बलराम जाखड़ ने इस इलाके में कांग्रेस की अलख जलाई थी, उसके बाद सुनील जाखड़ ने उस विरासत को आगे बढ़ाया था। अब उनका भतीजा संदीप जाखड़ विरासत को आगे बढ़ाने की कवायद कर रहा है। संगरूर से कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे सुरजीत धीमान का भतीजा जसविंदर धीमान कांग्रेस की टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। जसविंदर पिछले चुनाव से ही टिकट की मांग कर रहे थे, इस बार पार्टी ने उन्हें मौका दिया है।

बेटों को टिकट न मिलने से कई दिग्गज नाराज

एक तरफ नई पीढ़ी से चुनावी मैदान सज चुका है तो दूसरी तरफ कई ऐसे दिग्गज भी हैं जो अपने परिवार की अगली पीढ़ी को टिकट न मिलने की वजह से अपनी पार्टियों से नाराज भी चल रहे हैं। इनमें कांग्रेस के दिग्गज नेता तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, कांग्रेसी सांसद जसबीर सिंह डिंपा व अमरीक सिंह प्रमुख हैं। राणा गुरजीत सिंह भी कांग्रेस से बेटे को टिकट न मिलने की वजह से नाराज हैं, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को सुल्तानपुर लोधी से आजाद खड़ा कर दिया है। तृप्त बाजवा अपने बेटे रविनंदन के लिए आज भी टिकट की मांग कर रहे हैं, वहीं सांसद जसबीर डिंपा खडूर साहिब से अपने बेटे उपदेश गिल के लिए टिकट मांग रहे हैं। समराला से पूर्व विधायक अमरीक सिंह भी अपने बेटे कर्णवीर सिंह ढिल्लों को टिकट देने की मांग कर रहे हैं।

Edited By: Pankaj Dwivedi