जागरण संवाददाता, जालंधर : पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाए जाने तक पंजाब सरकार कीमत की बजाय मात्रा (प्रति लीटर) पर टैक्स निर्धारित करें। मौैजूदा समय में तेल के बेसिक मूल्य और एक्साइज ड्यूटी पर वैट वसूला जा रहा है, जो टैक्स को दोगुना कर रहा है और पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन (पीपीडीए) पंजाब के अध्यक्ष परमजीत ¨सह दोआबा ने मांग की है कि वैट पेट्रोलियम उत्पादों की बेसिक कीमत पर ही लगाया जाना चाहिए, जो कच्चे तेल के 78 डॉलर प्रति बैरल होने और डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत घटने के बावजूद तेल की कीमतें बढ़ने नहीं देगा।

पीपीडीए, पंजाब के प्रवक्ता मौंटी गुरमीत सहगल ने कहा कि मौजूदा समय में राज्य सरकार की तरफ से पेट्रोल पर 22 रुपये प्रति लीटर और केंद्र की तरफ से 19 रुपये प्रति लीटर टैक्स वसूला जा रहा है। सहगल ने कहा कि अगर केंद्र की तर्ज पर प्रति लीटर टैक्स फिक्स कर दिया जाएगा तो राज्य की आमदनी स्थायी हो जाएगी और कच्चे तेल की निरंतर बदलती कीमतें भी उसे बदल नहीं सकेंगी। राज्य सरकार के टैक्स की वजह से ही पंजाब में कीमतें उत्तर भारत में सबसे ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि सोमवार को जालंधर में पेट्रोल 86.03 रुपये प्रति लीटर और होशियारपुर में 86.38 रुपये प्रति लीटर की दर पर बिका। 16 जून 2017 को पेट्रोल की कीमत 70.70 रुपये प्रति लीटर के आसपास थी जो 10 सितंबर 2018 को 86.38 रुपये प्रति लीटर पर जा पहुंची है। इसी अवधि में डीजल 54.95 रुपये प्रति लीटर से 72.92 रुपये प्रति लीटर की दर पर जा पहुंची है। वहीं, दूसरी तरफ व्यापार सेना, पंजाब के र¨वदर धीर और विपन ¨प्रजा ने कहा कि कांग्रेस ने सोमवार को भारत बंद कर पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों का विरोध जताया, लेकिन पंजाब सरकार पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर अपने हिस्से का वैट तो कम नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि लोगों को राहत देने के लिए राजस्थान सरकार ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगने वाली वैट की दर में कटौती की है और कीमतें नीचे आई हैं। इसी तर्ज पर पंजाब सरकार को भी सूबे में पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर वैट की दर फौरन कम करनी चाहिए।

Posted By: Jagran