जालंधर, [शाम सहगल]। चिकन से कोरोना वायरस फैलने की अफवाह ने पोल्ट्री कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। चंद दिनों में आधे रह गए चिकन व अंडों के दामों के कारण कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है। कारण, इतने पैसों में उनका खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है। उधर, सोशल मीडिया सहित कई माध्यमों से चिकन से कोरोना फैलने की अफवाह से लोगों में डर है। इस कारण लोग इन दिनों अंडे खाने से भी परहेज कर रहे हैं। कोरोना वायरस से पहले जिले में रोजाना औसतन छह करोड़ का कारोबार होता था। जो इन दिनों तीन करोड़ के आसपास ही रह गया है।

वायरस की अफवाह से चंद दिनों में ही रिटेल बाजार में फ्रेश चिकन के दाम 100 रुपये प्रति किलो तक रह गए हैं। जबकि, पिछले वर्ष इन दिनों में चिकन के रेट 180 से 200 रुपये प्रति किलो थे। यही स्थिति अंडों की है। थोक में शनिवार को 295 प्रति सैकड़ा अंडे बेचे गए। जबकि, पिछले वर्ष इन दिनों दाम 400 सैकड़ा से ऊपर थे। समराला के पोल्ट्री फार्मर इन्द्रजीत कंग बताते हैं कि एक चुजा 40 रुपये के करीब पड़ता है। उसके मुर्गा बनने में 25 दिन लग जाते हैं। उस पर औसत रोजाना पांच रुपये का दाना पानी पर खर्च आता है। ऐसे में अगर दो किलो वजन भी होता है तो वह 190 रुपये का पड़ता है। जबकि, बाजार में रिटेल में ही 100 रुपये किलो में बेचा जा रहा है।

काॅमर्शियल बिक्री पर नहीं पड़ा खासा असर

सहगल चिकन स्टोर नजदीक स्काईलार्क चौक के मालिक सुरिंदर सिंह सहगल बताते हैं कि दाम आधे होने के बावजूद घरेलू उपभोक्ता घटे हैं। हालांकि काॅमर्शियल इस्तेमाल करने वाले निरंतर खरीदारी कर रहे हैं।

सरकारी प्रयासों के तहत जागरूकता की जरूरत

पोल्ट्री कारोबारी इंद्रमोहन बताते हैं कि इन दिनों में केवल अफवाहों के कारण ही लोग चिकन या अंडे खाने से परहेज कर रहे हैं। कारोबार को बचाने के लिए सरकार को पहलकदमी करते हुए लोगों को जागरूक करना चाहिए।

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Posted By: Satpaul

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