जालंधर, [जगदीश कुमार]। पराली जलाने और दीवाली की रात चलाए गए पटाखों के धुएं के कारण आसमान में स्मॉग की चादर छाई हुई है। शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक स्तर पर पहुंच चुका है। स्मॉग के कारण जनजीवन भी प्रभावित होने लगा है। एक्यूआइ में पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा तीन गुणा से भी ज्यादा बढ़ने से लोगों को आंखों में जलन, एलर्जी और सांस लेने में परेशानियां होने लगी हैं। सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों में जयादातर स्माॅग की वजह से परेशान है। डाक्टरों ने अस्थमा और टीबी के मरीजों के स्माॅग के दौरान घर से बाहर न आने की सलाह दी है।
 

सिविल अस्पताल में जिला टीबी अधिकारी डाॅ. राजीव शर्मा का कहना है कि हवा में पार्टिकूलेट मैटर का ग्राफ बढ़ने की वजह से गले में खारिश व हलकी खांसी महसूस कर रहे है। इसकी वजह से फेफड़ों में सूजन होने से अस्थमा और टीबी के मरीजों को खासी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में 30 फीसद के करीब स्माॅग की वजह से परेशानी से जूझ रहे हैं।

जालंधर के व्यस्त बीएमसी चौक फ्लाईओवर पर स्मॉग की चादर के बीच आगे बढ़ते हुए वाहन।

नाक कान व गले के माहिर डाॅ. रमेश अरोड़ा का कहना है कि शहरों से ही नहीं गांवों में लोग स्माॅग की वजह से परेशान हैं। गांव के लोग पहले झोलाझाप डाक्टरों से इलाज करवाते हैं और बीमारी बिगड़ने के बाद शहर आ रहे हैं। स्माॅग की वजह से नाक, कान और गले में एलर्जी की समस्या बढ़ रही है। स्माॅग में डस्ट की वजह बालों में रूसी बढ़ रही है जो कानों को भी प्रभावित कर रही है।

  • डॉक्टरों की सलाह, बचाव ही सबसे अच्छा उपाय
  • स्मॉग में बाहर न निकलें।  अस्थमा और टीबी रोगियों को खास हिदायतें।
  • मास्क लगा कर बाहर निकलें।
  • इन दिनों सुबह 5-6 बजे की बजाय धूप निकलने के बाद तकरीबन 8 बजे वॉक पर जाएं।
  • दिन में तकरीबन 4 लीटर तक पानी पीएं।
  • घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पीएं। इससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई सही बनी रहेगी और वातावरण में मौजूद जहरीली गैसे अगर ब्लड तक पहुंच भी जाएंगी तो कम नुकसान पहुंचा पाएंगी।
  • नाक के भीतर के बाल हवा में मौजूद बड़े डस्ट पारि्टकल्स को शरीर के भीतर जाने से रोक लेते हैं। इस लिए बालों को पूरी तरह से ट्रिम न करें।
  • बाहर से आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें।
  • दिन में दो बार भाप लें।
  • अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं नियमित समय पर लें। इमरजेंसी के लिए इन्हेलर पास रखें।
  • साइकिल व पैदल से चलने वाले लोग भी मास्क और दो पहिया वाहन चलाने वाले हेलमेट लगाएं।

    (डॉ. शोभना बंसल, जिला एपीडिमोलाजिस्ट)

 
 

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