जेएनएन, जालंधर। अकाली दल के विधायक पवन टीनू व पूर्व विधायक सरबजीत सिंह मक्कड़ के बीच सालों पुरानी खुन्नस नकोदर चौक पर फिर जगजाहिर हो गई। डॉ. बीआर अंबेडकर की 126वीं जयंती पर नकोदर चौक पर लगे उनके बुत को पुष्पांजलि देने पहुंचे दोनों नेता आपस में भिड़ गए।

विधायक पवन टीनू ने सरबजीत सिंह मक्कड़ पर मुक्का तान दिया। ऐन मौके पर शिअद नेताओं ने टीनू का हाथ पकड़ लिया और उन्हें शांत करके साइड पर ले गए। अकाली विधायक व सीनियर नेता अजीत सिंह कोहाड़ बीच-बचाव में आगे आए और दोनों को शांत करवाया।

पवन टीनू शुक्रवार सुबह नकोदर चौक पर पहुंचे। इसके बाद सेठ सतपाल मल और फिल्लौर से शिअद विधायक बलविंदर सिंह खैहरा भी पहुंचे। तीनों मिलकर कोहाड़ का इंतजार करने लगे। जैसे ही कोहाड़ पहुंचे तो चारों नकोदर चौक पर लगी बाबा साहब की प्रतिमा के पास पहुंच गए। ऐन मौके पर सरबजीत सिंह मक्कड़ भी पहुंच गए। मक्कड़ के समर्थकों ने पूरा माहौल कैप्चर कर लिया और उनके समर्थन में नारेबाजी की। पहले दोनों के समर्थक आपस में उलझे।

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इस बीच, टीनू मक्कड़ के साथ फोटो नहीं करवाने की बात कहकर साइड हो गए। टीनू समर्थक सीधे मक्कड़ से उलझ पड़े। देखते ही देखते मक्कड़ और टीनू आमने-सामने हो गए और टीनू ने मक्कड़ पर मुक्का तान दिया। इस दौरान दोनों के समर्थक अपने-अपने नेता के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। हालांकि थोड़ी ही देर में मामला शांत भी हो गया। सभी नेताओं ने एक-एक करके डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को फूलों के हार पहनाए। बाद में धन्यवाद भाषण में टीनू ने कहा कि मक्कड़ मेरे बड़े भाई हैं, इसलिए उनका भी यहां आने पर आभार।

दोनों नेताओं के बीच पहले से है खुन्नस

बता दें कि मक्कड़ और टीनू के बीच खुन्नस काफी पुरानी है। साल 2012 में आदमपुर हलके के रिजर्व होने की वजह से पवन टीनू को यहां से टिकट दी गई थी जबकि इससे पहले इस हलके से सरबजीत मक्कड़ विधायक चुने गए थे। पवन टीनू का आरोप रहा है कि मक्कड़ के समर्थक हमेशा हलके में उनके खिलाफ चलते हैं। वहीं, मक्कड़ की भी नाराजगी रही है कि टीनू ने हमेशा हलके में उनके समर्थकों को नजरअंदाज किया है।

मुक्का नहीं जयघोष लगाने लगा था : टीनू

इस संबंध में विधायक पवन टीनू ने कहा कि सरबजीत मक्कड़ उनके बड़े भाई जैसे हैं। वह मक्कड़ पर मुक्का नहीं तान रहे थे बल्कि जयघोष लगाने जा रहे थे। ये जयघोष मक्कड़ के मुंह तक कैसे पहुंचा और क्या जयघोष लगाने वाले का कोई हाथ पकड़ता है, इस सवाल के जवाब पर टीनू ने कहा कि कई बार जोश में ऐसे हो जाता है।

800 लोगों की थी व्यवस्था, पहुंचे 2000 से ज्यादा

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 126वीं जयंती पर कांग्रेस सरकार बनने के बाद दोआबा में करवाया गया पहला राज्यस्तरीय समारोह पूरी तरह से अव्यस्वथा की भेंट चढ़ गया। जिस हॉल में समारोह रखा गया था, वहां आठ सौ लोगों के बैठने की व्यवस्था है, समारोह में दो हजार से ज्यादा लोग पहुंच गए। ज्यादा लोग जमा होने से बार-बार हंगामा होता रहा।

समारोह शुरू होते ही वीआइपी, बुलाए गए मेहमानों और मीडिया के लिए रिजर्व रखी गई सीटों पर कांग्रेसी वर्कर बैठ गए। मंच से बार-बार कहा गया कि रिजर्व सीटों को खाली कर दिया जाए ताकि मेहमानों को जगह मिल सके लेकिन कांग्रेसी वर्कर कुर्सियों पर जमे रहे। बार-बार कहने के बाद भी वर्कर नहीं उठे तो प्रशासनिक कर्मचारी वर्करों के पास जाकर कुर्सियां खाली करने का आग्रह करने लगे। इस पर कांग्रेसी वर्कर कर्मचारियों से ही उलझ गए। शोर इतना हो गया कि मंच पर बैठे सिंचाई व बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह, सांसद संतोख सिंह चौधरी और सभी विधायकों का ध्यान भी हंगामा कर रहे वर्करों पर केंद्रित हो गया। कई सीनियर कांग्रेसी नेताओं ने बीच-बचाव कर वर्करों को चुप कराया।

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Posted By: Kamlesh Bhatt