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Paddy Procurement in Punjab: धान की रोपाई का सीजन शुरू, श्रमिकों की कमी से जूझने लगा पंजाब

पंजाब में धान की खेती शुरू (Paddy Procurement in Punjab) हो गई है। लेकिन इसी के साथ किसानों को श्रमिकों की कमी से भी जूझना पड़ रहा है। वहीं बिजली और पानी आदि से भी किसानों त्रस्त हैं। धान कटाई के समय किसानों को पराली जलाने की समस्या से भी जूझना पड़ेगा। फिलहाल किसान रोपाई के लिए श्रमिक कहां से लाएं ये बड़ी चुनौती है।

By Inderpreet Singh Edited By: Prince Sharma Wed, 12 Jun 2024 07:33 PM (IST)
रोपाई का काम शुरू होते ही श्रमिकों की कमी से जूझने लगा पंजाब

इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़। 11 जून से पंजाब भर में धान की रोपाई का काम शुरू होते ही श्रमिकों की कमी से पंजाब जूझने लगा है।

हालांकि, इस बार सरकार ने किसानों को ज्यादा से ज्यादा नहरी पानी का उपयोग करने को कहा है और इसकी व्यवस्था भी की जा रही है लेकिन जिस प्रकार से पंजाब में भूजल गहराने की नई नई रिपोर्ट आ रही हैं उसने नीति शास्त्रियों के चेहरों पर शिकन की लकीरों को गहरा जरूर कर दिया है।

जून के महीने में जहां धान के लिए श्रमिकों, बिजली और पानी आदि की कमी से किसानों को जूझना पड़ रहा है वहीं अक्टूबर, नवंबर में पराली को जलाने की समस्या से दो चार होना भी तय है क्योंकि इस बार धान का रकबा पिछले साल के मुकाबले बढ़ना भी तय है।

धान के विकल्प के तौर पर उगाई जाने वाली कपास की फसल का रकबा इस बार मात्र 79 हजार हेक्टेयर रह गया है। जिसे दो लाख हेक्टेयर तक ले जाने का दावा कृषि विभाग करता आ रहा था।

कपास की फसल से मोहभंग

गुलाबी सुंडी के कारण किसानों को कपास की फसल से मोहभंग हो गया है और सभी ने धान की ओर मुंह कर लिया है। पिछले साल धान का रकब 31.5 लाख हेक्टेयर था जिसके इस साल और बढ़ने के आसार हैं। वहीं, दूसरी ओर राज्य में धान रोपाई के लिए श्रमिकों की कमी आ रही है।

राज्य में ज्यादातर धान की रोपाई के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले श्रमिकों पर ही किसान निर्भर रहते हैं। इन राज्यों से अभी श्रमिक आने शुरू ही हुए हैं जिन जिलों में रोपाई का काम पहले शुरू हो जाता है उनमें इस बार धान रोपाई का रेट 4000 छू रहा है।

दरअसल अभी कई जिलों में धान की रोपाई का काम 15 जून से शुरू होगा, उस दिन के बाद से श्रमिकों की मांग बढ़ेगी। जहां इसकी तैयारियां हो गई हैं वहां 3500 रुपए से 4000 और कहीं कहीं 4500 रुपए प्रति एकड़ के मांगे जा रहे हैं।

संगरूर जिले में सबसे ज्यादा धान

संगरूर जिला जहां सबसे ज्यादा धान की खेती होती है वहां यह रेट पिछले साल प्रति एकड़ 3500-3700 रुपए था, जब कि इस साल 4000-4500 प्रति एकड़ मेहनताना दिया जा रहा है। दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों की कमी के कारण प्रति एकड़ 1000 रुपए ज्यादा मेहनताना देने पड़ रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इसी संसदीय सीट के चुनाव प्रचार में कांग्रेस के प्रत्याशी सुखपाल खैहरा और शिअद अमृतसर के बठिंडा से लड़ रहे लक्खा सिधाना ने अन्य राज्यों को जमीन खरीदने पर पाबंदी लगाने संबंधी कहा था जिसका काफी विरोध हुआ।

ज्यादातर जिलों में रोपाई का काम 15 से 20 जून के बीच में होगा। श्रमिकों की मांग में तब और तेजी आने की संभावना है। फिलहाल किसान अपनी पक्की लेबर और स्थानीय लेबर से काम चला रहे हैं। फतेहगढ़ के अवतार सिंह ने बताया कि एक साथ रोपाई का काम शुरू होने के कारण श्रमिकों की कमी आ जाती है इसलिए श्रमिक मनचाहा रेट मांगते हैं। स्थानीय लेबर से काम चलाना पड़ता है।

धान रकबा 24 लाख हेक्टेयर से 31.5 लाख पहुंचा

काबिले गौर है कि साल 2007-12 के कार्यकाल के दौरान गिरते भूजल के चलते तब की अकाली सरकार ने दस जून से पहले रोपाई करने पर पाबंदी लगा दी थी। इससे भूजल गिरने की रफ्तार कम होने की बजाए और बढ़ गई क्योंकि धान रकबा 24 लाख हेक्टेयर से 31.5 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

कृषि विभाग के पूर्व कमिश्नर डॉ बलविंदर सिंह सिद्धू ने बताया कि अगर सरकार धान की रोपाई 20 जून निश्चित कर दे तो भूजल गिरने की रफ्तार और कम हो सकती है क्योंकि 30 जून को पंजाब में मानसून की आमद हो जाती है और 20 से 25 जून के बीच प्री मानसून शुष्क मौसम में नमी ला देती है। जिससे खेतों में लगने वाले पानी का वाष्पीकरण कम हो जाता है।

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