जागरण संवाददाता, जालंधर

पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी शशिकांत ने पंजाब सरकार की तरफ से ड्रग्स पैडलरों को फांसी की सजा दिए जाने संबंधी केंद्र को भेजे जाने वाली सिफारिश को गैर जरूरी बताते हुए नशा रोकने को बनाए गए मौजूदा कानूनों को ही सख्ती से लागू करना जरूरी बताया है। डीजीपी शशिकांत मंगलवार को जालंधर में अदालत में चल रहे मानहानि मामले में पेश होने आए थे। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।

शशिकांत ने कहा कि अगर पंजाब सरकार नशा रोकने को मौजूदा कानून ही लागू कर दे तो भी पंजाब में नशा बंद हो सकता है, फांसी रोकने का प्रावधान राज्य में मात्र कांग्रेस और अकाली-भाजपा के बीच बदला लेने के लिए ही प्रयोग होगा। दोनों ही सरकारों ने नशा रुकवाने के लिए कुछ खास नहीं किया है और पिछले साढ़े 11 साल की अवधि में छोटे ड्रग पैडलरों और नशे का सेवन करने वालों पर ही डंडा चलाया जा सका है। किसी बड़े ड्रग्स व्यापारी पर हाथ डाला ही नहीं जा सका। आइपीसी की धारा में बदलाव के लिये पंजाब सरकार को केंद्र के पास सिफारिश भेजने के अलावा गृह एवं कानून मंत्रालय से भी इसकी स्वीकृति लेनी होगी, जो एक लंबी एवं जटिल प्रक्रिया है कैप्टन सरकार की सिफारिश पर भाजपा ऐसा हरगिज नहीं होने देगी। मीडिया की सकारात्मक भूमिका से मामले हो रहे उजागर

पूर्व डीजीपी ने कहा कि अभी पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारी एवं मुलाजिम नशे के कारोबार में लिप्त हैं जिनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नशे से युवाओं की मौत पहले भी हो रही थी लेकिन मीडिया की सकारात्मक भूमिका के चलते अब ऐसे मामले उजागर हो रहे हैं।

Edited By: Jagran

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