यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 05, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जानिए कौन हैं पर्सलिप ब्लाइंड सुल्तान मोहम्मद, भगवान कृष्ण के हैं भक्त, पढ़ते हैं गीता और कुरान; बांसुरी के सब कायल
पर्सलिप ब्लाइंड सुल्तान मोहम्मद कृष्ण भक्त हैं। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के गांव तेलका के रहने वाले सुल्तान अंध ...और पढ़ें

अमृतसर [दुर्गेश कुमार मिश्र]। ये कृष्ण भक्त सुल्तान हैं। कहने को तो ये मुसलमान हैं, लेकिन गीता और नमाज दोनों पढ़ते हैं। यही नहीं, पर्सलिप ब्लाइंड सुल्तान मोहम्मद जब बांसुरी की तान छेड़ते हैं तो राहगीरों के भी पांव खुद-ब-खुद ठिठक जाते हैं। मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के गांव तेलका के रहने वाले 24 वर्षीय सुल्तान अंध विद्यालय अमृतसर में 11वीं कक्षा के छात्र हैं। पांच भाई-बहनों में सुल्तान चौथे नंबर पर हैं। इन्हीं की तरह इनके तीन भाई भी पर्सलिप ब्लाइंड हैं। पर्सलिप ब्लाइंड व्यक्ति की देखने की क्षमता सिर्फ दस फीसद होती है। वह 90 फीसद दृष्टिहीन होता है। अंध विद्यालय के छात्रावास में रहकर शिक्षा हासिल करने वाले सुल्तान को न केवल कुरान की कुछ आयतें याद हैं, बल्कि वह रामचरित मानस की चौपाइयां भी धाराप्रवाह सुनाते हैं।
वे विद्यालय की लाइब्रेरी में रखे ब्रेल लिपि में लिखे भागवत पुराण और गीता को भी पढ़ते हैं। सुल्तान सुबह और शाम भोजन से पहले गायत्री मंत्र का पाठ करना नहीं भूलते। संगीत में ही अपना भविष्य तलाशने वाले सुल्तान भगवान श्रीकृष्ण के भक्त भी ठीक रसखान की तरह हैं। खुसरो और रसखान की परंपरा को बढ़ा रहे हैं आगे देखा जाए तो सुल्तान मोहम्मद अमीर खुसरो और रसखान की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि सभी को अपना जीवन जीने की स्वतंत्रता है। इसमें धर्म आड़े नहीं आना चाहिए। वे कहते हैं कि हजरत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य अमीर खुसरो की एक रचना है 'छाप तिलक सब छीनी'। इसमें उन्होंने श्रीकृष्ण का नाम लिए बिना ही उनके गुणों का बखान किया है। वैसे ही रसखान भी थे, जिन्होंने भगवान कृष्ण पर कई कविताएं लिखी हैं। ये दोनो भी मुसलमान ही थे। अपने धर्म में रहते हुए भी ये कृष्ण के भक्त थे। वैसे ही मैं भी रामायण और जुमे की नमाज दोनो पढ़ता हूं।
पं. हरि प्रसाद चौरसिया हैं आदर्श
सुल्तान का कहना है कि वह अभी बांसुरी बजाना सीख रहे हैं, लेकिन उनके आदर्श प्रसिद्ध बांसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया हैं। उन्हीं की तरह वह भी नाम कमाना चाहते हैं। इसके लिए वह तीन से चार घंटे रोजाना रियाज करते हैं।विविध भारती से मिलता है सीखने कोसुल्तान मोहम्मद का कहना है कि उनके बांसुरी वादन को निखारने में रेडियो काफी हद तक सहायक है। वैसे तो वह अंध विद्यालय में ही मास्टर गगनदीप और हरवंश से प्रशिक्षण लेते हैं, लेकिन रेडियो पर आने वाले विविध भारती के कार्यक्रमों को नियमित रूप से सुनते हैं।
सुल्तान का कहना है कि विविध भारती पर बांसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया, प्रवीण गौर खिंडे और राकेश चौरसिया के कार्यक्रम सुनकर बांसुरी वादन की बारीकियों को समझने और सीखने का मौका मिलता है। सुल्तान श्री दुग्र्याणा तीर्थ अमृतसर में प्रतिवर्ष होने वाली राग सभा में बांसुरी वादन के लिए सम्मानित किए जा चुके हैं। इसके अलावा जिलास्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में भी सम्मान मिल चुका है। वे जालंधर में होने वाले हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में शामिल होना चाहते हैं। इसके लिए वे तीन साल से तैयारी भी कर रहे हैं।
