जालंधर, जेएनएन। शहर में दो साल से राजनीतिक टकराव के कारण अंधेरा कायम है। एलईडी लाइट्स लग नहीं पाई और जो सोडियम लाइट्स लगी हैं, वह ठीक से मेंनटेन नही हो रहीं। शहर में 65 हजार से ज्यादा स्ट्रीट लाइट्स प्वाइंट हैं। इनमें से पांच हजार से अक्सर बंद रहते हैं। इस कारण शहर के कई इलाकों में शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। राजनीतिक कारणों से रोके गए एलईडी स्ट्रीट लाइट्स प्रोजेक्ट का नतीजा आम पब्लिक को भुगतना पड़ रहा है।

राजा के दो साल के राज में लोगों को नहीं मिली कोई बड़ी राहत

मेयर जगदीश राज राजा के कार्यकाल के दो साल 24 जनवरी को पूरे हो जाएंगे। उन्होंने 25 जनवरी 2018 को मेयर पद संभाला था। उनका अब तक का कार्यकाल शहर के लिए खराब ही रहा है। सड़क, सीवरेज-सफाई, जल आपूर्ति, कूड़ा और स्ट्रीट लाइट्स के मामले में शहरवासियों को राहत की बजाए मुश्किल ही मिली है। अकाली-भाजपा सरकार के समय शहर में शुरू हुए एलईडी लाइट्स प्रोजेक्ट को मेयर जगदीश राजा ने रोक दिया था। प्रोजेक्ट रोकने के पीछे के कारण क्वालिटी, रेट या प्लान में गड़बड़ी नहीं बल्कि राजनीतिक थे। एलईडी लाइट्स प्रोजेक्ट साल 2017 में शुरू हुआ, 2018 में रद कर दिया गया। अब साल 2020 आ गया है लेकिन अभी तक नया प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ा।

जालंधरः पॉश आबादी लाजपत नगर की एक सड़क पर बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें।

छह महीने अभी और करना पड़ेगा इंतजार

स्मार्ट सिटी के तहत करीब 50 करोड़ का टेंडर लगा है। इसके पास होने और काम ग्राउंड लेवल तक आने में अभी 6 महीने और लग सकते हैं। नगर निगम पिछले दो सालों में पुरानी लाइटों के रखरखाव पर 4 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इसका शहर को कोई फायदा नहीं मिल रहा, ठेकेदारों को जरुर कमाई हो रही है।

नई शर्तों पर काम नहीं करना चाहते ठेकेदार

नगर निगम ने पुरानी स्ट्रीट लाइट्स के रखरखाव के लिए नए टेंडर देने हैं लेकिन इनकी शर्तें काफी सख्त हैं। इसलिए ठेकेदार आगे नहीं आ रहे। पुराने ठेके को एक्सटेंड किया जा रहा है। नए टेंडर में जुर्माने के लिए शिकायत सेवा को सरकार की एम-सेवा ऐप से जोड़ दिया गया है। शिकायत के 48 घंटे में स्ट्रीट लाइट ठीक नहीं होती है तो ठेकेदारों को ऑटोमेटिकली जुर्माना लगेगा। पुराने टेंडर में जुर्माना अफसर की मर्जी से लगता है।

एलईडी लाइट्स के ठेके में नहीं मिली गड़बड़ी

मेयर जगदीश राजा ने पीसीपी इंटरनेशनल कंपनी से किया एलईडी लाइट्स का ठेका रद कर दिया था। आरोप लगाया था कि यह प्रोजेक्ट 100 करोड़ रुपये महंगा है। कंपनी भी विवाद के बाद प्रोजेक्ट पर काम नहीं करना चाहती थी। इसलिए शहर में लगाए 5500 प्वाइंट के लिए 8 करोड़ की मांग को लेकर कंपनी कोर्ट भी गई है। हालांकि सरकार की जांच में प्रोजेक्ट में गड़बड़ी नहीं निकली। कंपनी से विवाद के कारण शहर की मेन रोड लगी 5500 लाइट्स भी कई महीने नहीं जल पाई थीं।

खस्ताहाल सड़कें और बंद स्ट्रीट लाइट्स से हो रहे हादसे

शहर में सड़कों ही हालत भी खराब है और ऐसे में स्ट्रीट लाइट्स न होने से यह सड़कें खून पी रही हैं। खराब सड़कों पर अंधेरे के कारण हादसे हो रहे हैं। मेनटनेंस का हाल यह है कि शिकायत पर ठेकेदार काम ही नहीं करते। वह जान चुके हैं कि एलईडी स्ट्रीट लाइट्स लगते ही उनका काम खतम हो जाएगा इसलिए वह काम पर कम और कमाई पर ज्यादा पर ध्यान दे रहे हैं। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि स्ट्रीट लाइट्स में कांग्रेस की राजनीति ठेकेदारों के लिए फायदेमंद रही।

 

 

 

 

 

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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