जालंधर टीम, जेएनएन। नया साल, नई उम्मीदें। उम्मीद शहर में हर समस्या से मुक्ति की। नई सुविधाएं मिलने की। इस बात की कि जो पहले दर्द मिला वह इस बार न मिले। वह चाहे सारा साल खराब सड़कों से हुई परेशानी से हुआ हो या सड़कों पर लगे कूड़े के ढेरों से शर्मसार होते शहरवासी हों। हर कोई उम्मीद लगाए बैठा है कि नया साल खुशियां लेकर आएगा। खिलाड़ियों को अच्छी सुविधाएं मिलेंगी। क्राइम और शहर में लगते जाम से मुक्ति मिलेगी। बच्चियों से हो रहे अत्याचार से भी शर्मसार नहीं होंगे जालंधरी। खेल और लेदर इंडस्ट्री को मिलेगी रफ्तार। आइए, जानते हैं इस वर्ष शहर के कौन-कौन से सपने पूरे होने की उम्मीद है।

हवाई सेवाः आदमपुर में सिविल टर्मिनल का काम तेजी से चल रहा है। इसके बनने के बाद यहां से मुंबई और अन्य बड़े शहरों के लिए फ्लाइट की सुविधा मिलेगी। यही नहीं अभी सबसे बड़ी परेशानी दिल्ली तक जाने वाली फ्लाइट में देरी की है। उम्मीद की जा रही है कि नए साल में यात्रियों को ज्यादा परेशानी न हो।

स्वास्थ्य सेवाएं

1.    सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की तीसरी मंजिल पर 1.20 करोड़ की लागत से आठ बेड की क्षमता वाला हाईटेक बर्न यूनिट बनकर तैयार होगा।

2.   सिविल अस्पताल में पूरा सिस्टम ऑनलाइन किया जाएगा। इससे लोगों को अस्पताल में होने वाली परेशानियों से निजात मिलेगी। टेस्ट समेत हर जानकारी ऑनलाइन मिलेगी।

3.    निजी नशा छुड़ाओ केंद्रों के लिए नीतियां तैयार होंगी ताकि यहां भर्ती लोगों से हो रही लूट को रोका जा सके।

4.     शहर को पीजीआइ और एम्स की तर्ज पर बेहतर सुविधाओं वाला मेडिकल कॉलेज मिले।

5.    तीन कम्युनिटी सेंटर जहां अभी मात्र ओपीडी की सुविधा है वहां पर इंडोर मेडिकल सुविधाएं मिलें। ताकि लोगों को सिविल अस्पताल की बजाए घर के निकट ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें।

6.    सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों व स्टाफ की

कमी पूरी होगी।

7.     ईएसआइ अस्पताल को ईएसआइ कारपोरेशन में टेकओवर करे ताकि इसे भी लुधियाना की तरह मॉडल अस्पताल बनाया जा सके।

मकसूदां

-मकसूदां सब्जी में लगने वाली अवैध फड़ियां होंगी शिफ्ट

-नई दाना मंडी में सीवरेज डालने का काम होगा पूरा, बनेंगी सड़कें

-मकसूदां सब्जी मंडी में कूड़े के ढेरों से मिलेगी निजात, लगेगा कूड़े से खाद बनाने

का प्लांट

-स्मार्ट कार्ड के साथ सब्सिडी पर राशन देने का प्रोजेक्ट होगा शुरू

मल्टी पार्किंग जाम से मिलेगी मुक्ति

शहर में सबसे बड़ी समस्या वाहनों की पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं होना है। लोगों को मजबूरन सड़कों के किनारे ही अपने वाहन खड़े करने पड़ते हैं। ऐसे में सड़कों पर जाम के हालात बन जाते हैं और दूसरा सड़क पर गाड़ी पार्क करने पर ट्रैफिक पुलिस वाहनों को जबत कर लेती है। नए साल में लोगों को पार्किंग के लिए उचित जगह मिले। शहर की सबसे बड़ी जरूरत मल्टी लेवल पार्किंग की है। निगम ने मॉडल टाउन में तो इसके लिए प्लान बनाना शुरू कर दिया है। लेकिन बाजारों खासकर ज्योति चौक के पास मल्टी लेवल पार्किग बनने से शहरवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।

लेदर इंडस्ट्री मंदी से उबरेगी

लेदर इंडस्ट्री पर पिछले साल हाई कोर्ट की सख्ती के कारण ताले लग चुके हैं ऐसे में इंडस्ट्री मालिक ही नहीं बल्कि इससे जुड़े कामगारों से भी रोजगार छिनने के हालात बन गए हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि इंडस्ट्री संचालक बिना काम करवाए मजदूरी दे रहे हैं। इंडस्ट्री संचालक टेनरीज को लेकर हाई कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे और यह इंडस्ट्री एक बार फिर से प्रफुल्लित होगी यही कामना की जाती है।

इंफ्रास्ट्रक्चरः नगर निगम, स्मार्ट सिटी, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट

-1000 करोड़ रुपये के सरफेस वाटर प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा।

-शहर में सुरक्षा के मद्देनजर इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनेगा।

-प्रीत नगर सोडल रोड पर बरसाती सीवरेज प्रोजेक्ट पूरा होगा।

-120 फुटी रोड पर 20 करोड़ से स्टार्म सीवरेज प्रोजेक्ट पूरा होगा।

-घास मंडी में लड़कियों का नया सरकारी कॉलेज बनकर तैयार होगा। 

-बर्ल्टन पार्क में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स पर काम शुरू हो सकता है

-शहर की चार सड़कों को स्मार्ट रोड बनाया जाएगा।

-इंप्रूवमेंट ट्रस्ट नई कॉलोनी डवलप कर सकता है।

-मॉडल टाउन में मल्टीस्टोरी स्मार्ट पार्किंग की व्यवस्था होगी।

-स्मार्ट सिटी के तहत ई-रिक्शा बढ़ाए जाएंगे।

-रेलवे स्टेशन का सेकेंड एट्री गेट मिलने से लोगों को राहत मिलेगी।

-21 करोड़ रुपये की लागत से पानी सप्लाई की खराब पाइपों को बदला जाएगा।

-150 करोड़ से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अपग्रेड होंगे।

-स्मार्ट सिटी के तहत करीब 20 बड़े पार्कों का सुंदरीकरण होगा।

-बस्ती बावा खेल नहर का सुंदरीकरण और साइकिल ट्रैक बनकर तैयार होगा।

-शहर के 11 चौकों को रि-डवलप करने से ट्रैफिक सिस्टम में सुधार।

-सरकारी स्कूलों और दफ्तरों की इमारतों पर सोलर पावर प्लांट लगेंगे।

सीसीटीवीः हर साजिश होगी बेनकाब

शहर में कई बार सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्लानिंग बनी। पुलिस प्रशासन के कहने पर भी कई जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए लेकिन मुख्य मार्गों और चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने के कारण अपराधी किसी भी घटना को अंजाम देकर निकल जाते हैं। इस साल हर चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगें यही शहरवासियों की मांग है।

सरकारी गर्ल्स कॉलेजः छात्राओं को होगा लाभ

शहर में अभी तक कोई भी लड़कियों का सरकारी कॉलेज नहीं है। पिछले साल मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बूटा मंडी में सरकारी गर्ल्स कॉलेज का नींवपत्थर रखा। शहरवासियों को इस कॉलेज के इसी साल पूरी तरह बनकर तैयार होने और यहां पर इसी साल लड़कियों की पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद है।

रेल अंडर ब्रिजः कई इलाकों के लोगों को होगा फायदा

गुरु गोबिंद सिंह एवेन्यू के लोगों को सूर्या एन्क्लेव के नजदीक रेलवे फाटक के कारण बेहद परेशानी होती है। लोग लंबे समय से मांग कर रहे थे कि यहां पर आरयूबी बनाया जाए। पिछले साल के अंत में आरयूबी बनाने का काम शुरू हो चुका है। इलाके के लोगों को जल्द ही आरयूबी क सौगात मिलेगी। इससे न केवल गुरु गोबिंद सिंह एवेन्यू बल्कि आसपास के इलाकों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

पीएपी चौक फ्लाईओवर पर रैंप देगा राहत

हाल ही में शुरू हुए पीएपी फ्लाईओवर से लोगों को राहत तो मिली है लेकिन शहर से अमृतसर और पठानकोट रोड को जाने वालों को रामामंडी तक जाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एनएचएआइ ने लोगों को राहत देने के लिए पीएपी चौक से एक रैंप बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसे मंजूरी मिलने और बनने से लोगों को भारी राहत होगी।

खेलः एथलेटिक ट्रैक की मिलेगी सौगात

-स्पोर्ट्स कॉलेज का एथलेटिक्स ट्रैक बदलने की उम्मीद।

-स्पोर्ट्स कॉलेज व स्कूल की सीटें भरने की उम्मीद।

-बर्ल्टन पार्क में स्पोर्ट्स स्टेडियम बनने उम्मीद।

-जिला खेल विभाग को विभिन्न खेलों के नए कोच मिलने की उम्मीद।

-सरकारी स्कूलों को फिजिकल एजुकेशन के शिक्षकों के खाली पद भरे जाएंगे।

-फोकल प्वाइंट में 60 केवी का बिजली घर बनेगा।

-जालंधर में पॉवरकाम का कंज्यूमर ग्रीवेंसिस रिड्रेसल फोरम का ऑफिस खुलने की उम्मीद।

-हंसराज स्टेडियम को बैडमिंटन का सिंथेटिक कोर्ट मिलेगा।

-जिला खेल विभाग की ओर से हॉकी और फुटबॉल विंग शुरू होने की उम्मीद

स्पोट्र्स इंडस्ट्री: शहर की जान स्पोर्ट्स इंडस्ट्री इन दिनों भारी मंदी झेल रही है। कारण चीन से बने खेल के उत्पादों का आयात। जम्मू-कश्मीर से अभी तक क्रिकेट के बैट बनवाकर यहां इन्हें बेचने से लागत बढ़ गई थी। उम्मीद करते हैं कि यह इंडस्ट्री फिर रफ्तार पकड़ेगी।

 

 

 

 

 

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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