जालंधर [जगदीश कुमार]। युवा लड़के-लड़कियों को रोजगार देने का सपना कुलभूषण जैन 1994 में देखा था। इसके लिए उन्होंने भारत पैरा मेडिकल वेल्फेयर सोसायटी का गठन किया। उस समय केवल नर्सिंग पास करने वाली छात्रओं को ही रोजगार दिलाया जाता था। धीरे-धीरे युवाओं को अन्य काम सिखाने शुरू किए गए और फिर उन्हें छोटे-छोटे संस्थानों में नौकरी दिलाई गई। सपना यही था कि युवा गलत संगत में पड़ने की बजाय नौकरी करें ताकि उनके घर की हालत भी सुधरे। उनके निधन के बाद विरासत में मिली जिम्मेवारी को आगे बढ़ा रहे हैं उनके बेटे मानव जैन।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग के एमडी मानव जैन कहते हैं कि पिता जी हमेशा मानवता की सेवा करने की प्रेरणा दी थी जिसे उन्होंने जिंदगी का आधार बनाया है। मानव बताते हैं कि देहात और शहरी आबादी में किसी भी वर्ग से जुड़े लड़के-लकड़ियां जिन्हें पढ़ने की इच्छा है और आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से पढ़ाई नहीं कर पाते उन्हें प्राथमिकता दी जाती है। नर्सिंग इंस्टीट्यूट और लाडोवाली रोड पर यूथ को स्किल व रोजगार देने की व्यवस्था की गई है।

सेंटर में फ्री में कराए जाते हैं कई तरह के कोर्स

बारहवीं पास बच्चों को कंप्यूटर के साथ-साथ कॉल सेंटर में काम करने की वालंटियरों की ओस से फ्री में ट्रेनिंग दी जाती है। इसी तरह बुजुर्गों की संभाल, डाटा एंट्री ऑपरेटर्स तथा इससे कम पढ़े बच्चों को अन्य हाथ के काम सिखाए जाते हैं। मानव जैन का कहना है कि शुरुआती दौर में केवल पांच बच्चे ही सोसायटी की सुविधा का लाभ ले पाते थे। पिछले पांच साल में सोसायटी के बैनर तले 100-120 बच्चों को हर साल ट्रेंड कर उन्हें रोजगार दिलाने में कामयाबी मिल रही है।

पिता स्व. कुलभूषण जैन के निधन के बाद उन्होंने अपनी माता वीना जैन के साथ उनका सपना साकार करने के सफर को आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनके साथ ट्रेनिंग देने वाले मुफ्त सेवाएं देने के लिए वालंटियर व रोजगार देने वाले अस्पताल, मॉल्स, कॉल सेंटर्स व इंडस्ट्री के लोग जुड़ने लगे हैं। सरकार की ओर से शुरू कार्यक्रमों का भी लाभ मुहैया करवाया जाता है।

 

 

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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