जालंधर, जेएनएन। मुख्य खेतीबाड़ी अफसर जालंधर डॉ. सुरिंदर सिंह ने मक्की के काश्तकारों को मक्की के फाल आर्मी वर्म से सचेत रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि जिले में धोगड़ी, बजूहा व अलीपुर गांवों में कुछ स्थानों पर मक्की की फसल में फाल आर्मी वर्म कीड़े के हमले की रिपोर्ट मिली है। यह कीड़ा मक्की की गोभों व पत्तों को खाकर गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इसलिए मक्की के किसानों को जागरूक रहने की जरूरत है।

गांव अलीपुर का सर्वेक्षण कर रही खेतीबाड़ी विभाग की टीम में शामिल खेतीबाड़ी विकास अफसर डॉ. मंदीप सिंह ने बताया कि गांव अलीपुर में पलविंदर सिंह के लगभग तीन एकड़ मक्की के रकबे में फाल आर्मी वर्म का कीड़ा देखा गया है। यह कीड़ा तेजी से बढ़ता है। मादा झुंड में अंडे देती है, जिनमें से निकली सुंडियां लगातार 15 दिन तक फसल को नुकसान पहुंचाती हैं। इन सुंडियों की पहचान उनकी पूंछ के नजदीक बने चार बिंदुओं व सिर की तरफ सफेद रंग के अंग्रेजी के अक्षर वाई के उलटे निशान से हो जाती है।

डॉ. मंदीप सिंह ने कहा कि खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी ने इस कीड़े की रोकथाम के लिए कोराजन 18.5 एससी 0.4 मिलीलीटर या डेलीगेट 11.7 एससी 0.4 मिलीलीटर या मिजाइल 5 एससी 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर गोभ पर छिड़काव करने की सिफारिश की है। कीटनाशक के छिड़काव के बाद कम से कम 21 दिन तक मक्की को चारे के लिए इस्तेमाल न करने की भी सिफारिश है।

किसान कीटनाशक खरीदते समय बिल जरूर लें

डॉ. सुरिंदर सिंह ने किसानों को अलग-अलग कीटनाशक दवाइयों की खरीद रजिस्टर्ड डीलरों व संस्थाओं से लेने व पक्का बिल जरूर प्राप्त करने की सलाह दी है। डॉ. सुरिंदर सिंह ने किसानों से अपील की कि अगर कोई गांवों आदि में दवा बेचता आए तो तुरंत अपने हलके के खेतीबाड़ी विभाग के अधिकारियों या कर्मचारियों के ध्यान में लाएं। केवल खेती माहिरों की सलाह के बाद ही कीटनाशकों का इस्तेमाल करें। उन्होंने जिले के दवा विक्रेताओं, खाद और बीज आदि की बिक्री करने वाले विक्रेताओं से कहा कि वे किसानों का साथ देते हुए उन तक प्राथमिक वस्तुएं पहुंचाएं और क्वालिटी कंट्रोल एक्ट अनुसार किसानों को इन वस्तुओं की बिक्री करें।

 

 

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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