अंकित शर्मा, जालंधर : सैरेब्रल पाल्सी यानी सीपी से जूझने वाली खुशबू अग्रवाल ने सीबीएसई 12वीं से ह्यूमेनिटीज में 94.6 फीसद अंक हासिल किए हैं। यूं तो सैरेब्रल पाल्सी से जूझने वाले अपनी शारीरिक अक्षमता को देखकर हिम्मत छोड़ देते हैं, मगर खुशबू जिद, जज्बे और जुनून से नई इबारत लिख रही है। उसे परिवार का भी साथ मिल रहा है। यही कारण है कि वो निरंतर परिश्रम करती रहती है चाहे रास्ते में लाख रुकावटें ही क्यों न आएं। खुशबू कैंब्रिज स्कूल की छात्रा है।

उसकी मां नैना गृहिणी व पिता नरेश बिजनेसमैन हैं और कपूरथला रोड पर रोटेवेट प्लेट्स का व्यापार करते हैं। खुशबू ने दसवीं में 76 फीसद अंक हासिल किए थे। मां नैना ने बताया कि जब खुशबू नौ महीने की थी, तब उसकी इस कमी के बारे में पता चला था। लुधियाना और चंडीगढ़ सहित कई जगह इलाज करवाया। शुरू से ही उसकी हालत बेहद नाजुक रही और हर मुश्किल से वह लड़कर खड़ी हो जाती थी। यही कारण है कि खुशबू बेहद दृढ़ इरादों की है और किसी पर निर्भर होना नहीं चाहती, ताकि कोई उसकी हालत पर दया भाव न दिखाए। अब वह केएमवी में ह्यूमेनिटीज ग्रुप में दाखिला ले रही है।

क्या है सैरेब्रल पाल्सी

सैरेब्रल पाल्सी (सीपी) एक तरह विकारों का एक समूह है। जो शरीर के किसी भी अंग और मांसपेशियों या गतिविधि को प्रभावित करता है। यह विकार जन्म के पहले मस्तिष्क चोट के कारण होता है। सैरेब्रल का अर्थ है मस्तिष्क से जुड़ाव और पाल्सी का अर्थ है मांसपेशियो में कमजोरी और उपयोग करने में समस्या होना। मगर व्यक्ति अपने दृढ़ इरादों और अपनों के साथ से स्थिति में सुधार कर पाते हैं।

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