जागरण संवाददाता, जालंधर। लोक इंसाफ पार्टी के नेता सुखपाल खैहरा ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह बेअदबी मामले की धीमी गति की जांच से अपने बादल दोस्तों को फायदा पहुंचा रहे हैं। रविवार को यहां मीडिया से मुखातिब सुखपाल सिंह खैहरा ने कैप्टन पर आरोप लगाया कि वह एसआइटी की तरफ से पेश किए गए चालान में जिम्मेदार लोगों के नाम सामने होने के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

खैहरा ने कहा है कि एसआइटी की तरफ से पेश किए गए चालान में यह साबित हो चुका है कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ बठिंडा में दर्ज एफआइआर को कैंसिल करवाने, राम रहीम को अकाल तख्त साहिब से माफी दिलवाने, बेअदबी मामलों के दौरान तत्कालीन एडीजीपी इंटेलिजेंस का तबादला करवाने में सीधे तौर पर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ही जिम्मेदार थे। एसआइटी की तरफ से पेश चालान की कॉपी दिखाते हुए सुखपाल सिंह खैहरा ने दावा किया कि जांच में यह साबित किया गया है कि शांत तरीके से बैठी संगत के ऊपर गोलियां चलवाने की साजिश में तत्कालीन राजनेता एवं पुलिस नेतृत्व शामिल था। चालान में बकायदा तौर पर साजिश के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों एवं राजनीतिज्ञों के नाम दिए गए हैं।

खैहरा ने यह भी आरोप लगाया कि बादल परिवार के हरियाणा की भाजपा सरकार के ऊपर बनाए गए दबाव के चलते ही फरीदकोट की अदालत से मिले आदेशों के बावजूद डीसी रोहतक ने एसआइटी को रोहतक जेल में बंद डेरा प्रमुख से पूछताछ की अनुमति नहीं दी। सुखपाल खैहरा ने कहा कि सीबीआइ क्लोजर रिपोर्ट का विरोध कर सुखबीर सिंह बादल घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। सच्चाई यह है कि दशकों तक जांच चलती रहने के मकसद से ही प्रकाश सिंह बादल ने खुद ही जांच सीबीआइ के हवाले की थी। सुखपाल खैहरा ने कहा कि पंजाब सरकार को भी सीबीआइ क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करना चाहिए और बेअदबी मामले की जांच पंजाब पुलिस सही करवाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ही बेहद ही मामले की जांच करने में पूरी तरह से सक्षम है। खैहरा ने समान विचारधारा वाली तमाम विपक्षी पार्टियों एवं पंथक ताकतों को इस मामले में इंसाफ के लिए हाथ मिलाने को कहा है। 
 

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