जालंधर, [कमल किशोर/रमन जिंदल]। कोरोना काल में सेवक मशीनें बंद होने की वजह से उपभोक्ताओं को घंटों लाइनों में खड़े होकर बिजली का बिल जमा करवाना पड़ रहा है। सोमवार को जब दैनिक जागरण की टीम ने बड़िंग के पावरकाम कार्यालय का निरीक्षण किया तो बिल जमा करवाने वाले उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें लगी हुई थी। उपभोक्ताओं ने मास्क तो पहने हुए थे, लेकिन शारीरिक दूरी का ख्याल नहीं रख रहे थे। वहां विभाग की तरफ से सैनिटाइजर का भी इंतजाम नहीं था।

बिल पकड़ने वाले कर्मचारी ने मास्क नहीं पहना हुआ था। उधर, नार्थ जोन के चीफ इंजीनियर जैनइंद्र दानिया ने कहा कि अगर बडिंग के पावरकाम कार्यालय की स्थिति अगर ऐसी है तो यह गंभीर बात है। मंगलवार को इसे चेक करवाएंगे। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि कोरोना के बढ़ते केसों को देखते हुए घर बैठे ही बिल की अदायगी आनलाइन करें।

आनलाइन पेमेंट करने में विश्वास नहीं

कस्तूरबा नगर कैंट निवासी अजीत कुमार ने कहा कि सेवक मशीनें बंद होने की वजह से घंटों तक लाइनों में लगकर बिल जमा करवाना पड़ता है। आनलाइन पेमेंट जमा करवाने में विश्वास नहीं है, इसलिए बिजली घर में आकर बिल जमा करवाते है। कोरोना के बावजूद वहां सैनिटाइजर नहीं रखा हुआ था।

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गलती पावरकाम की, परेशानी लोगों की बढ़ी

पिंड कोटली के रहने वाले लखविंदर राय ने बताया कि घंटों लाइनों में लगकर बिल जमा करवाना मुश्किल लगता है। एवरेज बिल लगकर आ रहा है, जिसकी वजह बिल को सही करवाने के लिए कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जिले में 89 सेवक मशीनें थी। पावरकाम को वित्तीय नुकसान होने की वजह से मशीनें बंद कर दी गईं, जिसका खामियाजा उपभोक्ता को भुगतना पड़ रहा है।

कई बार सर्वर डाउन होने से जमा नहीं होती पेमेंट

बड़िंग के रहने वाले विनय कुमार ने कहा कि बेशक पावरकाम ने आनलाइन पेमेंट जमा करवाने की सुविधा दे रखी है, लेकिन कई बार सर्वर डाउन होने की वजह से पेमेंट जमा नहीं होती। अंतिम तिथि होने के कारण मजबूरी में बिल जमा करवाने के लिए बिजली घर आना पड़ता है।

सेवक मशीनें होती तो नहीं लगना पड़ता लाइनों में

पतारा के रहने वाले जसविंदर सिंह ने कहा कि यहां लाइनों में लगकर बिल जमा करवा रहे हैं। शारीरिक दूरी का ख्याल न रखने से कोरोना का खतरा है। सेवक मशीनें होती तो उपभोक्ताओं को लाइनों में नहीं लगना पड़ता। उपभोक्ताओं के बिल जमा करवाने के लिए पावरकाम ने मात्र एक खिड़की खोल रखी है। इसकी संख्या बढ़ानी चाहिए।

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