जालंधर, जेेएनएन। 34 साल बाद आई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने सराहना की है। रविवार को जिला सचिव मनमीत सिंह और प्रदेश सचिव चिरांशु रतन ने कहा कि 1986 में शिक्षा नीति में अब तक कोई सुधार नहीं हुआ था। मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति को 21वीं सदी के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों पर समान रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। इससे विद्यार्थियों की प्रतिभा में चहुंमुखी निखार आएगा।

इसमें पांचवीं कक्षा तक बच्चे अपनी मातृ भाषा में पढ़ सकेंगे। विद्यार्थी छठी के बाद स्किल्स बढ़ाने वाले कोर्सों की तरफ ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। वहीं, स्ट्रीम सिस्टम में बदलाव भी स्वागत योग्य है। इसके अनुसार साइंस का विद्यार्थी कॉमर्स, कॉमर्स का विद्यार्थी आर्ट्स के विषय अपनी रुचि के अनुसार पढ़ सकेगा। इन सब प्रयासों से रट्टा पद्धति खत्म होगी और ज्ञान को बढ़ावा मिलेगा। पढ़ाई के साथ साथ ही बच्चों में कौशल भरने से वह व्यावहारिक रूप से ज्ञान हासिल कर पाएगा। इससे वह पढ़ाई के दौरान ही रोजगार शुरू कर पाएंगे और नए रोजगार से जुड़़ सकेंगे।

सचिव मनमीत सिंह और प्रदेश सचिव चिरांशु रतन ने कहा कि केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति को बेरोजगारी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है। इससे 21वीं सदी के भारत को कौशल युक्त देश बनाने का उद्देश्य भी पूरा हो सकेगा। उन्होंने कहा कि हम मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किए जाने का भी स्वागत करते हैं। वैसे भी, इसे पहले इसी नाम से जाना जाता था।

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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