विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 03, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Power Crisis In Punjab: बिजली संकट के कारण अब तीन दिन बंद रहेगी इंडस्ट्री, घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने लगी थोड़ी राहत

By Kamlesh BhattEdited By:
Published: Sat, 03 Jul 2021 10:41 AM (IST)Updated: Sat, 03 Jul 2021 10:59 AM (IST)

Power Crisis In Punjab पंजाब में बिजली संकट के कारण पावरकाम ने नार्थ जोन में इंडस्ट्री का एक आफ-डे और ...और पढ़ें

बिजली संकट के कारण पंजाब में इंडस्ट्री तीन दिन बंद। सांकेतिक फोटो
बिजली संकट के कारण पंजाब में इंडस्ट्री तीन दिन बंद। सांकेतिक फोटो

जेएनएन, जालंधर/चंडीगढ़। पंजाब में बिजली संकट बरकरार है। पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकाम) ने लार्ज स्केल इंडस्ट्री में काम बंद रखने का एक दिन (आफ-डे) और बढ़ा दिया है। अब इंडस्ट्री शनिवार के बजाय रविवार सुबह आठ बजे से काम शुरू कर पाएगी। पावरकाम के नार्थ जोन में इंडस्ट्री को पहले दो दिन के लिए वीरवार से शनिवार तक काम बंद रखने को कहा गया था, लेकिन नए आदेशों में अब उन्हें 48 के बजाय 72 घंटे काम बंद रखना होगा।

पावरकाम के नार्थ जोन के डिप्टी चीफ इंजीनियर एचएस बंसल ने बताया कि कैटेगरी-दो व तीन का वीरवार को शुरू किया गया आफ-डे रविवार सुबह आठ बजे तक चलेगा। दूसरी तरफ कैटेगरी-एक की लार्ज स्केल (एलएस) सप्लाई इंडस्ट्री पर भी शुक्रवार को आफ-डे लागू कर दिया गया है, जो सोमवार सुबह तक जारी रहेगा। कैटेगरी-एक में वह इंडस्ट्री शामिल रहती है, जो घरेलू फीडर से सप्लाई लेती है। इस कदम से इंडस्ट्री में उत्पादन खासा प्रभावित होगा। शुक्रवार शाम तक लुधियाना में तीस फीसद उत्पादन कम हो गया, जबकि जालंधर में 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

वहीं, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से दफ्तरों का समय बदलने और इंडस्ट्री की बिजली में कटौती के फैसलों का असर दिखाई दिया। राज्य में वीरवार को बिजली की मांग 14500 मेगावाट चल रही थी, जो शुक्रवार सुबह दस बजे के लगभग 13100 मेगावाट हो गई, लेकिन जैसे ही दो बजे सरकारी दफ्तर बंद हुए, यह मांग गिरकर 12044 मेगावाट हो गई। हालांकि, शाम तक यह 12337 मेगावाट से लेकर 12500 मेगावाट के बीच चलती रही। इसी कारण अघोषित कट कम लगे।

पंजाब को अपने थर्मल प्लांटों से 1400 मेगावाट, अपने हाइड्रो पावर स्टेशनों से 802 मेगावाट, प्राइवेट थर्मल प्लांटों से 3082 मेगावाट बिजली मिली, जबकि अन्य स्त्रोतों को मिलाकर यह 12000 मेगावाट के आसपास रही। दो प्लांटों से नहीं मिल रही 870 मेगावाट बिजलीबठिंडा के तलवंडी साबो स्थित प्लांट का 660 मेगावाट का एक यूनिट बंद है, जिसके जुलाई के तीसरे हफ्ते से पहले चलने की उम्मीद नहीं है। इसी तरह रोपड़ थर्मल प्लांट का भी एक यूनिट बंद होने से 210 मेगावाट बिजली नहीं मिल पा रही है। रोपड़ थर्मल प्लांट के छह यूनिट हैं, जिनमें से सरकार ने दो स्थायी तौर पर बंद कर दिए हैं, जबकि एक चल नहीं रहा है।

सरकार को संकट से उबरने के लिए मानसून का इंतजार

सरकार को बिजली संकट से उबरने के लिए मानसून का इंतजार है। बारिश होती है तो बिजली की मांग में कमी आएगी। पंजाब में बिजली की मांग धान की रोपाई के कारण ही बढ़ी है। बारिश न होने की वजह से मोटरें लगातार चल रही हैं। पावरकाम का कहना है कि अधिक लोड की वजह से कई जगह ट्रांसफारमर खराब हो गए हैं। बिजली बोर्ड के पूर्व चेयरमैन बलदेव सिंह सरां ने कहा कि बिजली की ट्रांसमिशन लाइनों पर काम करने की जरूरत है। इनकी क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए।

सियासत गर्माई

शिअद, बसपा और भाजपा का प्रदर्शन शुक्रवार को प्रदेश भर में शिरोमणि अकाली दल, बहुजन समाज पार्टी और भाजपा ने बिजली कट के विरोध में प्रदर्शन किया। सुखबीर बादल ने फाजिल्का और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने बठिंडा प्रदर्शन किया। शिअद को बसपा का भी समर्थन मिला। वहीं, भाजपा नेताओं ने भी जगह-जगह प्रदर्शन किए।