नितिन धीमान, अमृतसर। भारत-पाकिस्तान को विभाजित करती अंतरराष्ट्रीय सीमा अटारी के समीप जन्मे 'बार्डर' को पाकिस्तान ने लेने से इन्कार कर दिया। इस कारण वह सीमा पार नहीं कर सका और परिवार सहित दोबारा भारत लौट आया। दरअसल, भारत में फंसे सौ हिंदू पाकिस्तानी नागरिकों को सोमवार को वतन वापसी का समाचार मिला। वे लोग पिछले ढाई महीने से यहीं थे और दस्तावेज पूरे न होने से अटारी सीमा के पास रैनबसेरा में आश्रय लिए हुए थे। इनमें दंपती निंबो और बालम राम भी शामिल था। आज कुछ हिंदू नेता अब बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि बच्चे को पाकिस्तान भेजा जा सके।

निंबो ने दो दिसंबर को अटारी के समीप रैनबसेरा में ही नवजात को जन्म दिया। अटारी गांव के लोगों ने उसे मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवाई थी। सीमा के पास जन्म होने के कारण नींबो के पति बालम राम ने बच्चे का नाम 'बार्डर' रखा। सभी 100 लोगों को वतन लौटाने के लिए एसएसपी देहाती राकेश कौशल व डिप्टी कमिश्नर गुरप्रीत ङ्क्षसह खैहरा लगातार विदेश मंत्रालय के संपर्क में थे। इन सभी के दस्तावेज तैयार किए।

'बार्डर' की मां निंबो के पासपोर्ट पर उसका नाम दर्ज किया गया। सोमवार शाम जब रिट्रीट सेरेमनी खत्म हुई तो सभी को पाकिस्तान भेजा गया। वहां पाकिस्तानी रेंजर्स ने बार्डर का जन्म प्रमाणपत्र मांगा। उनका तर्क था कि वह कैसे मान लें कि यह बच्चा निंबो का है। दस्तावेज के बगैर 'बार्डर' को बार्डर पार नहीं करवाया जाएगा। निंबो, उसके पति व चार बच्चों के दस्तावेज पूरे थे, पर 'बार्डर' को बार्डर पर अकेला नहीं छोड़ सकते थे। ऐसे में वे लौट आए। शेष हिंदू पाकिस्तानियों को प्रवेश करने दिया गया। अटारी सीमा पर बीएसएफ के प्रोटोकाल अफसर अरुण कुमार ने बताया कि इस परिवार का वह ख्याल रख रहे हैं। बार्डर के दस्तावेज भी तैयार करवाकर शीघ्र ही वतन भेजा जाएगा।

सुबह मिली खुशी, शाम को मायूसी

सोमवार को वतन वापसी से पहले नींबो के पति बालम राम ने कहा कि खुशी है कि उन्हें पाकिस्तान भेजा जा रहा है। भाजपा नेता अनुज भंडारी ने इन सभी नागरिकों की वतन वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अटारी सीमा पर इमीग्रेशन व कस्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद इन्हें अटारी सीमा के रास्ते पाकिस्तान रवाना किया गया था, पर खुशी के ये पल उस ओर से मिली रुसवाई की वजह से गम बन गए।

एजेंट ने लगवाया 25 दिन का वीजा, झूठ बोल कहा दो माह का लगा है

पाकिस्तानी नागरिकों का यह दल कोरोना काल में भारत के विभिन्न धार्मिक एवं एतिहासिक स्थलों का भ्रमण करने आया था। पाकिस्तानी ट्रेवल एजेंट ने इनका 25 दिन का वीजा लगवाकर झूठ कहा कि उनका दो महीने का वीजा लगा है। एक माह पहले जब वे पाकिस्तान लौटने के लिए अटारी सीमा पर पहुंचे तो जांच में पाया कि उनका वीजा समाप्त हो चुका है। इस कारण इन्हें पाकिस्तान रेंजर्स ने लेने से इन्कार कर दिया था। ऐसी स्थिति में ये सभी अटारी सीमा के पास जिला प्रशासन की ओर से बनाए गए रैन बसेरा में रहने लगे थे।

Edited By: Kamlesh Bhatt