जालंधर, जेएनएन। हजारों किताबों के साथ 50 साल के सफर के बाद अब श्री गुरुनानक देव लाइब्रेरी के दिन बदलने वाले हैं। 50 साल में तमाम लोगों के करियर में चार चांद लगाने वाली यह लाइब्रेरी बीते 20 साल से बुरे दौर में गुजर रही थी। स्टाफ की कमी और सरकारी उपेक्षा के बाद भी लाइब्रेरी अपना अस्तित्व बचाने में सफल रही है। अब 50 साल के सफर के बाद इसे श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर डिजिटल रूप देकर नई जेनरेशन के लिए तैयार किया जा रहा है। जालंधर के पांच दशक के इतिहास में यह लाइब्रेरी अपनी सकारात्मक ऊर्जा व पठन-पाठन की सामग्री से भरपूर होने के बाद भी सरकारी उपेक्षा का शिकार थी। डिजिटलाइजेशन के बाद नए सिरे से यह युवाओं के लिए आकर्षक का केंद्र बन पाएगी।

नामदेव चौक की बाईं तरफ स्थित श्री गुरु नानक देव लाइब्रेरी को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया गया है। इस पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च कर इसकी अपलिफ्टमेंट तो की ही जाएगी, साथ ही पुरानी किताबों के खजाने को सहेजकर डिजिटल कर दिया जाएगा। किताबों को डिजिटल करने के अलावा 50 वर्ष पुरानी इमारत को भी नया रूप दिया जाएगा, जोकि अब पुरानी पडऩे लगी है और मरम्मत मांग रही है।

लाइब्रेरी परिसर में रीडिंग रूम के भीतर बैठने के अलावा धूप में बैठने के लिए भी जगह उपलब्ध है। खुले में घास है और पेड़ पौधे भी हैं, जो वातावरण को शुद्ध बनाते हैं एवं पढऩे वालों के लिए पूर्ण सुकून देते हैं। शहर में यह लाइब्रेरी 1957 में ही स्थापित कर दी गई थी, लेकिन जीटी रोड पर स्थित मौजूदा इमारत में 50 साल पहले ही पक्के तौर पर शिफ्ट कर दी गई।

शहर की पहली ईको फ्रेंडली इमारत

यह लाइब्रेरी ज्ञान बांटने के साथ-साथ वातावरण को भी साफ रखने का संदेश दे रही है। यह शहर की पहली ईको फ्रेंडली इमारत है। इमारत के निर्माण में सौ फीसद कुदरती स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है। इमारत की ऊंचाई तीन मंजिला इमारत के बराबर रखी है, ताकि भीतर ठंडक बनी रहे। इमारत ऊंची है और शीशे लगे होने के कारण सारा दिन सूरज की रोशनी अंदर अंधेरा होने ही नहीं देती। रीडिंग रूम की छत गोल है, जो कमल के आधे खिले फूल की तरह है। रूम में चारों तरफ किताबों के रैक हैं और बीच में पढऩे के लिए राउंड टेबल लगाया गया है।

92 हजार किताबों का खजाना

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा इस लाइब्रेरी की 92 हजार से ज्यादा किताबों के बेशकीमती खजाने से परीक्षा की राह आसान बनाते हैं। इस लाइब्रेरी को पंजाब की सबसे बेहतरीन लाइब्रेरियों में शुमार किया जाता रहा है। इसे राजा राम मोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन, कोलकाता से सर्वश्रेष्ठ लाइब्रेरी के तौर पर 50 हजार का नकद पुरस्कार भी मिल चुका है।

रोजाना करीब 150 लोग आते हैं पढ़ने

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से तैनात लाइब्रेरियन सुरिंदर कौर बताती हैं कि राजा राम मोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन, कोलकाता की ओर से लगभग 80 फीसद किताबें भिजवाई जाती हैं। अन्य किताबें स्थानीय स्तर पर ही खरीदी जाती हैं। किताबें व अखबार पढऩे के लिए यहां रोजाना विभिन्न आयु वर्ग के करीब 150 लोग आते हैं। यहां विभिन्न लेखकों की विभिन्न मसलों पर लिखी गई किताबें मौजूद हैं, जिसमें देश-विदेश का ज्ञान दर्ज है। डिजिटल होने के बाद दशकों पुरानी इन किताबों को लंबे अरसे के लिए संभाला जा सकेगा, जिससे आने वाली पीढिय़ों को भी इसका फायदा मिलेगा।

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Posted By: Sat Paul

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