जागरण संवाददाता, जालंधर : कोविड 19 के कारण निजी अस्पतालों के डॉक्टरों में तनाव पैदा हो गया है। क‌र्फ्यू के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह ने निजी अस्पतालों को ओपीडी खोलने के आदेश जारी किए थे। क‌र्फ्यू के बाद लॉकडाउन में कोरोना का खतरा मंडराने से मरीज जाने से कतरा रहे हैं। लोगों के डर को दूर करने के लिए सरकारी तंत्र की ई-संजीवनी में लोगों का रूझान बढ़ने लगा है।

आइएमए पंजाब के प्रदेश प्रधान डॉ. नवजोत सिंह दहिया का कहना है कि कोविड-19 के संकट में दूसरे उद्योगों की तरह निजी अस्पतालों को भी खासा नुकसान झेलना पड़ रहा है। निजी अस्पतालों में 50 से 60 फीसद तक मरीजों की गिरावट दर्ज की गई है। अस्पतालों में केवल इमरजेंसी ऑपरेशन ही किए जा रहे है। मरीज फोन पर रिपोर्ट भेज कर दवा लेकर काम चला रहे हैं। अस्पतालों में बहुत जरूरी हालात में मरीज पहुंच रहे है और खर्च लगातार बढ़ने से डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है। सरकारी की तरफ से भी कोई मदद नहीं मिल रही है। इसके अलावा शहर के करीब आधा दर्जन अस्पतालों में कोरोना के मरीज मिलने से लोगों के दिलों में दहशत का माहौल पैदा हो गया है। वहीं, मरीज मिलने के बाद अस्पतालों का काम करीब एक सप्ताह तक बंद कर दिया जाता है। हालांकि, विभाग के प्रमुख सचिव ने सैनेटाइज कर खोलने की बात कही थी, परंतु हकीकत में सब उलटा है। डॉ नवजोत सिंह दहिया ने निजी डॉक्टर सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए है और सरकार को भी डॉक्टरों के लिए राहत पैकेज जारी की अपील की है।

Posted By: Jagran

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