गांव कादियावाली में सिलेंडर फटने से झुलसे सात मरीज सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। मरीज पहुंचते ही अस्पताल के स्टाफ के हाथ पांव फूलने लगे। अस्पताल में 60 लाख रूपये की लागत से बना बर्न वार्ड तो है लेकिन उसमें अस्पताल प्रशासन बेड भी नहीं लगा पाया है। करीब दो साल से काम चल रहा है और बेड्स का बजट न होने की वजह से दोबारा मरीजों का दर्द झलका। बर्न वार्ड के प्रभारी एसएमओ डॉ. चन्नजीव सिंह की मेहनत और सांसद नरेश गुजराल की ओर से भेजा एमपी लैड फंड भी किसी काम नहीं आया। मरीजों के साथ आई महिला आयोग पंजाब की पूर्व चेयरपर्सन गुरदेव कौर संघा भी पहुंची। एसएमओ ने अच्छे तरीके से बर्न वार्ड की बात उनके समक्ष रखी तो समाधान के लिए एक और आश्वासन मिला। अब देखना है कि बर्न वार्ड को कब बेड मिलते हैं।

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दानपात्र लगा लेते हैं फिर

सिविल सर्जन दफ्तर में स्वच्छ भारत को लेकर बैठक चल रही थी। सबसे पहले अपने आफिस में सुधार का मुद्दा उठा परंतु इसके लिए सरकारी फंड था। समस्या गंभीर हो बन गई। सभी बगलें झांकने लगे। इसके बाद सभी अधिकारियों ने दयाभावना दिखाई और आफिस के विकास कार्यों के लिए अपनी श्रद्धा के अनुसार जेब से पैसे निकाल कर दिए। इतने में जिला मॉस मीडिया अधिकारी किरपाल सिंह ने भी योगदान डाला और आफिस के बाहर विकास के लिए डोनेशन बॉक्स लगाने की सलाह दे डाली। उनकी बात सुन कर सभी दंग रह गए। एक - दूसरे की तरफ देखने लगे और बात हंसी मजाक में टाल दी। जिला मॉस मीडिया अधिकारी ने इसे गंभीरता से ले लिया और प्रेस नोट में उन्होंने डोनेशन बॉक्स लगाने का प्रस्ताव भी डाल दिया था। चर्चा हो रही है कि बात सिविल सर्जन तक भी पहुंच गई है।

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गर्मियों में इनका भी निकलेगा पसीना

मामला सिविल अस्पताल के मुर्दा घर का है। फ्रीजर की संख्या लगातार कम होती गई तो गर्मियों में मुर्दों के भी पसीने निकलेंगे। सरकारी मुर्दा घर में बिजली गुल होने पर अलग से जेनरेटर का इंतजाम है। जब फ्रीजर ही नहीं होंगे तो जेनरेटर भी किस काम का। मुर्दा घर में पहले 10 शव रखने की क्षमता वाले फ्रीजर थे। पिछले साल दो शव की क्षमता वाला एक फ्रीजर खराब हो गया और क्षमता आठ शव की रह गई। चंद रोज पहले ही चार शव की क्षमता वाले फ्रीजर की सांसें बंद हो गई। वर्तमान में मुर्दा घर में केवल चार शवों की क्षमता वाला एक फ्रीजर दम भर रहा है। मुर्दा घर के निर्माण के लिए पिछली बार जालंधर आए सांसद नरेश गुजराल ने शव गृह बनाने के लिए अस्पताल से डिमांड मांगी थी। वह डिमांड फाइलों में ही सड़ रही है।

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लगदा साडा मसला हल नहीं होणा

दिलकुशा मार्केट में रिटेल में दवा बेचने वालों का दबदबा बढ़ रहा है और शहर के केमिस्टों के गल्ले का वजन कम हो रहा है। मामला रिटेल और होलसेल दवाविक्रेताओं में मरीजों को डिस्काउंट देने का हैं। रिटेल केमिस्ट एसोसिएशन और होलसेल केमिस्ट आरगेनाइजेशन के प्रधानों की बैठकें समस्या का समाधान नहीं कर पाई। रिटेल केमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान संजय सहगल ने होलसेल के प्रधान रिशु महाजन के समक्ष दवाविक्रेताओं के चूल्हे की धीमी पड़ रही आंच का मामला रखा। दिलकुशा मार्केट वाले रिटेलर 35 फीसदी तक मरीजों को डिस्काउंट दे रहे है और शहर के रिटेलरों को इतने बड़े डिस्काउंट की दवा कड़वी लगती है। जिले के 1200 केमिस्टों की सेल कम और दिलकुशा में 22 के करीब होलसेलर कम रिटेलरों की बढ़ रही है। इसका असर होलसेलरों पर दिखने लगा है। कह रहे हैं, पॉलिसी बना कर साडा मसला हल करो।

Posted By: Jagran

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