जागरण संवाददाता, जालंधर : पावरकॉम के बिना नोटिस व ब्यौरे के बिजली बिल के अतिरिक्त चार्ज मांगने को जिला कंज्यूमर फोरम ने खारिज कर दिया है। साथ ही पावरकॉम को उपभोक्ता को बीस हजार रुपये हर्जाना और पांच हजार केस खर्च देने के भी आदेश दिए।

विकास मल्होत्रा निवासी 101, शंकर गार्डन ने फोरम को शिकायत दी थी कि उन्होंने जनक दुलारी से प्रॉपर्टी खरीदी थी। जिसमें उनके नाम पर पहले ही बिजली का मीटर लगा हुआ था। जिसके बिलों की वह अदायगी करते रहे हैं। 23 अक्टूबर 2018 को पावरकॉम ने उन्हें 40,474 रुपये का बिल भेज दिया। जिसे अतिरिक्त चार्जेस बताया गया लेकिन उसकी जानकारी नहीं दी गई। वो पावरकॉम की बूटा पिड मॉडल टाउन सब डिवीजन के एईई के दफ्तर गए। मगर, वो कोई ब्यौरा नहीं दे सके। विरोध जताने पर उन्हें बताया गया कि उनके मीटर का ऑडिट हुआ और मार्च 2015 से अक्टूबर 2016 के बीच उनका मीटर डिफेक्टिव निकला। शिकायतकर्ता ने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया। न ही सुनवाई का कोई मौका दिया गया।

फोरम ने पावरकॉम के चेयरमैन/एमडी व एईई को नोटिस निकालकर जवाब मांगा। संयुक्त जवाब में उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता ने शिकायत में सही तथ्य नहीं दिए हैं। उन्होंने बिल भेजे जाने की पुष्टि की लेकिन इसकी और कोई जानकारी नहीं दी। फोरम ने सप्लाई कोड एवं रेगुलेशन 2014 का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि ऐसे चार्जेस को सीधे बिल में जोड़ना गलत है और नियमों के खिलाफ है। पावरकॉम बकाया पैसे ले सकता है लेकिन इससे पहले पूरे ब्यौरे के साथ नोटिस भेजा जाना चाहिए था। इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। फोरम के प्रेजिडेंट करनैल सिंह व सदस्य ज्योत्सना ने अपने फैसले में अतिरिक्त चार्जेस की वसूली पर रोक लगाते हुए कहा कि पावरकॉम शिकायतकर्ता से नियमित बिल व अन्य खर्चे ले सकता है। इसके अलावा पावरकॉम को मानसिक परेशानी के एवज में 20 हजार और केस खर्च के तौर पर पांच हजार रुपये भी देने के आदेश दिए।

Posted By: Jagran

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