कुसुम अग्निहोत्री, जालंधर

शाहकोट विधानसभा उपचुनाव के लिए अकाली दल के स्व. अजीत ¨सह कोहाड़ के बेटे नायब ¨सह कोहाड़ को चुनाव मैदान में उतारने के बाद कांग्रेस में तूफान आ गया है। पार्टी के सत्ता में होने के चलते इस सीट से दिग्गज नेता पूर्व सीएम रा¨जदर कौर भट्ठल, केवल ¨सह ढिल्लों, पूर्व मंत्री अवतार हैनरी, जगबीर बराड़ भी अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। हालांकि यहां से कांग्रेस की जीत आसान नहीं होगी। सीट पर 21 वर्षो से अकाली दल का कब्जा है। अकाली इसे पंथक सीट मानते हैं। स्व. अजीत ¨सह कोहाड़ 1997 से लगातार पांच बार यहां से विधायक बने और तीन बार अकाली सरकार में मंत्री रहे। 2002 व 2017 में कांग्रेस की लहर में भी कोई उन्हें हरा नहीं पाया था। ऐसे में यह सीट कांग्रेस के लिए हॉट केक बनी हुई है।

उपचुनाव में दोआबा ही नहीं बल्कि बाहरी जिलों के नेताओं की नजर है। इनमें पूर्व सीएम रा¨जदर कौर भट्ठल, केवल ¨सह ढिल्लों, पूर्व मंत्री अवतार हैनरी, जगबीर बराड़ और यहां से बहुत कम अंतर से हारे हरदेव ¨सह लाडी शेरोवालिया भी हाथ आजमाने के इच्छुक हैं। कारण साफ है कि लंबे समय तक शाहकोट अकाली दल का मजबूत किला रहा है। अब अजीत ¨सह कोहाड़ के जाने के बाद किले की नींव कमजोर हुई है और कांग्रेसी इसका फायदा उठाने की फिराक में हैं। ऐसे में दोआबा की कांग्रेस लॉबी बाहरी जिले के कैंडीडेट को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। किसी मजबूरी में भी यह सीट दोआबा के कैंडीडेट को मिले, इसके लिए दावेदारियां व लॉ¨बग की जा रही हैं।

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एक तीर से दो निशाने लगाने के मूड में कैप्टन

कांग्रेस ने अभी अपना उम्मीदवार फाइनल नहीं किया है। अकाली दल की घोषणा के बाद अब कैप्टन भी अपनी सेना को तैयार करने में जुट गए हैं। एक साल के कार्यकाल में शाहकोट विधानसभा उपचुनाव कैप्टन सरकार के लिए 'प्रतिष्ठा का सवाल' भी रहेगा। ऐसे में कैप्टन को सोच समझ कर घेराबंदी करनी होगी। जानकार बताते हैं कि कैप्टन अम¨रदर ¨सह इस चुनाव के माध्यम से एक तीर से दो निशाने लगाने के मूड में हैं। पहला जीतने का और दूसरा चेयरमैनी का एक दावेदार खत्म करना। कैंट सीट बदल कर निकाय मंत्री नवजोत ¨सह सिद्धू को 'स्पीचलेस' करने के बाद शाहकोट उपचुनाव से वित्त मंत्री मनप्रीत ¨सह बादल पर भी अपनी छाप छोड़ने की कोशिश हो सकती है। अब कैप्टन के तरकश से कौन सा तीर निकलता है और किस निशाने पर लगता है, इसको लेकर पार्टी में घमासान शुरू हो गई है।

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आसान नहीं कांग्रेस की राह

नायब ¨सह कोहाड़ का भले ही राजनीतिक करियर अभी शुरू हुआ है लेकिन उनकी अपने हलके में काफी सरगर्मी है। नायब ¨सह जालंधर कोऑपरेटिव बैंक के एमडी मैने¨जग डायरेक्टर व चेयरमैन भी रह चुके हैं। इन पदों पर रहने के कारण उनका राबता सीधे किसानों व ग्रामीणों से रहा है। लोग खेतीबाड़ी से लेकर अपनी सारी समस्याओं को लेकर उनसे संपर्क साधते हैं।

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जुलाई तक करवाने होंगे चुनाव

अकाली विधायक जत्थेदार अजीत ¨सह कोहाड़ का निधन 4 फरवरी को हो गया था। उनके निधन से सीट खाली हो गई थी। ऐसे में सीट खाली होने पर सरकार को छह महीने के अंदर-अंदर उप-चुनाव करवाने होते हैं। ऐसे में अब उपचुनाव की घोषणा किसी भी समय हो सकती है।

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शाहकोट : 21 वर्षो से अकाली दल का एकछत्र राज

1997

पार्टी उम्मीदवार - वोट मिले

अकाली दल - अजीत ¨सह कोहाड़ - 59341 (27160 वोट से जीते)

कांग्रेस - दर्शन सिहं 32181

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2002

पार्टी उम्मीदवार - वोट मिले

अकाली अजीत सिहं कोहाड़ 48787 (5175 वोट से जीते)

कांग्रेस बृज भू¨पदर ¨सह लाली 43612

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2007

पार्टी उम्मीदवार - वोट मिले

अकाली दल अजीत सिहं कोहाड़ - 59642 (19261 वोट से जीते)

कांग्रेस सीडी ¨सह कंबोज 40381

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2012

पार्टी उम्मीदवार - वोट मिले

अकाली दल अजीत ¨सह कोहाड़ - 55642 (5435 वोट से जीते)

कांग्रेस सीडी ¨सह कंबोज - 50440

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2017

पार्टी उम्मीदवार - वोट मिले

अकाली दल अजीत ¨सह कोहाड़ - 46913 (4905 वोट से जीते)

कांग्रेस हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया -42008

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Posted By: Jagran

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