मनुपाल शर्मा, जालंधर : पेट्रोल पंपों के बाहर पेट्रोल की बिक्री में छूट दिए जाने के बोर्ड लग रहे हैं और जालंधर के एक पेट्रोल पंप की तेल डालने वाली मशीन में इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाकर महानगर के सैकड़ों उपभोक्ता लूट लिए गए। लखनऊ की तर्ज पर जालंधर के एक पेट्रोल पंप की तेल डालने वाली मशीन में इलेक्ट्रॉनिक चिप (अनअथोराइज्ड फि¨टग्स) लगा कर जालंधर के उपभोक्ताओं को ठगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इंडियन ऑयल कंपनी ने जालंधर छावनी रेलवे स्टेशन के बेहद नजदीक स्थित उक्त संबंधित डीलरशिप को टर्मिनेट कर पंप का संचालन अपने हाथ में लेने की कवायद आरंभ कर दी है। इंडियन आयल कंपनी के डीजीएम अतुल गुप्ता ने डीलरशिप टर्मिनेट करने की पुष्टि की है। हालांकि डीलरशिप का संचलान करने वाला इस सारे प्रकरण से अनभिज्ञता ही जाहिर कर रहा है। बीते वर्ष लखनऊ में ही कई पेट्रोल पंपों पर इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाकर तेल का खेल करने का मामला सामने के बाद कई डीलरशिप बंद कर दी गई थी। ऐसे काम करती है इलेक्ट्रॉनिक चिप

पूरे पैसे वसूल कर उपभोक्ता के वाहन में कम तेल डालने की मंशा से डिस्पेंसर (तेल डालने वाली मशीन) में मौजूद पल्सरों में इलेक्ट्रॉनिक चिप लगा दी जाती है। पल्सर मशीन डाले जाने वाले पेट्रोल की मात्रा जांचता है और इसी से मशीन के बाहर तेल की मात्रा डिसप्ले होती है। इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाकर मनमर्जी से तेल की मात्रा कंट्रोल कर ली जाती है। मशीन के बाहर मात्रा अधिक दिखाई देती है, जबकि वाहन मेंतेल कम जाता है।

कंपनी अधिकारियों की शमूलियत के बिना संभव ही नहीं

प्रत्येक छह माह के बाद पेट्रोल पंप पर लगी मशीनों की गहनता से जांच की जाती है और बाकायदा कंपनी के अधिकारी संबंधित मशीन के सही मात्रा में तेल डालने की पुष्टि करते हैं। जब संबंधित पेट्रोल पंप पर पिछली बार चे¨कग हुई तो कंपनी के अधिकारियों ने इसे सही बताया था। जानकारी के अनुसार इस बारे शिकायत हुई तो सही बताई गई मशीन में ही गड़बड़ी पाई गई। नियमों के मुताबिक कंपनी के अधिकारी ही इन मशीनों को खोल सकते हैं। किसी साधारण मैकेनिक को इस बारे जानकारी नहीं हो सकती। डीलरशिप टर्मिनेट, जांच जारी है : डीजीएम

इंडियन ऑयल कंपनी के डीजीएम अतुल गुप्ता ने स्वीकार किया कि संबंधित डीलरशिप पर चे¨कग के दौरान तेल डालने वाली मशीन में अनअथोराइज्ड फि¨टग्स (जिसे इलेक्ट्रॉनिक चिप आदि भी कहा जा सकता है) पाई गई थी। इसी वजह से डीलरशिप टर्मिनेट की गई है और कंपनी उस का संचालन खुद करने की कवायद में है। कंपनी के किसी अधिकारी की इस गड़बड़झाले में शमूलियत पर उन्होंने कहा कि अभी विभिन्न स्तरों पर इसकी जांच चल रही है और जांच पूरी होने पर ही कुछ कहा जा सकता है। हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है : सु¨रदर अग्रवाल

उपरोक्त डीलरशिप (पेट्रोल पंप) मेरे भाई का है। हमें इलेक्ट्रॉनिक चिप अथवा डीलरशिप टर्मिनेट होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर कंपनी ऐसा कह रही है तो उन्हें कहें कि लिखित में जानकारी दें। उपभोक्ता पेट्रोल पंपों पर कर सकते हैं क्वालिटी एवं मात्रा की जांच

प्रत्येक पेट्रोल पंप डीलरशिप पर एक 5 लीटर का कैन उपलब्ध रहती है, जिसे सरकार की तरफ से प्रत्येक वर्ष सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। उपभोक्ता इसमें तेल डलवा कर संबंधित पेट्रोल पंप पर डाले जाने वाले तेल की सही मात्रा का अंदाजा लगा सकते हैं। क्वालिटी जांच (मात्र पेट्रोल के लिए)

पेट्रोल की क्वालिटी की जांच पेट्रोल की कुछ बूंदें संबंधित पेट्रोल पंप पर उपलब्ध फिल्टर पेपर पर डाल कर की जा सकती है। अगर तो पेट्रोल फिल्टर पेपर से पूरा उड़ जाता है और पीछे कोई निशान नहीं रहता है तो इसका मतलब है कि पेट्रोल में कोई मिलावट नहीं है। मिलावट का निशान (अगर की गई है) फिल्टर पर ही रह जाता है।

डेंटिस्टी टेस्ट (पेट्रोल-डीजल दोनों के लिए)

जिस डेंटिस्टी के साथ पेट्रोल-डीजल डिपो पर पहुंचते हैं, उनमें पेट्रोल पंप पर पहुंचने के बाद .03 (प्लस-माइनस) का ही अंतर होना चाहिए। डिपो से जब ट्रक चलता है तो संबंधित कंपनी की तरफ से डेंटिस्टी संबंधी सर्टिफेकट दिया जाता है। जब ट्रक डीलरशिप पर पहुंचता है तो फिर से टेस्ट होता है, जिसे डीलरशिप पर लिखा जाता है। उपभोक्ता चाहें तो इसे भी चेक कर सकते हैं। अगर कोई मिलावट होगी तो अंतर .03 से ज्यादा ही होगा।

Posted By: Jagran