जालंधर, जेएनएन। इनकम टैक्स की वैकल्पिक व्यवस्था देकर सरकार ने लोगों को असमंजस में डाल दिया है। सरकारी मुलाजिम इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। यह आसानी से समझ आने वाली प्रक्रिया नजर नहीं आ रही है। बजट का विश्लेषण करते हुए सीए भूपेंद्र सलूजा ने कहा है कि जटिल प्रक्रिया होने के चलते आयकरदाताओं को कानून की जानकारी रखने वाले के पास जाना ही होगा। यह फैसला लेना भी बेहद जटिल होगा कि टैक्स की अदायगी पुराने या नए विकल्प से की जाए।

सलूजा ने कहा कि नए विकल्प में कई रियायतों को खत्म किया गया है। ऐसे में यह भी देखना होगा कि नए व पुराने विकल्प में से किसमें नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि डिविडेंड डिसटीब्यूशन टैक्स को खत्म करना एक अच्छा कदम है। कृषि एवं कृषि संबंधित कार्यों के लिए 2.83 लाख करोड़ का बजट रखा है। वित्त मंत्री ने 2022 तक कृषि आय को दोगुना करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा सरकार ने उम्दा मार्केटिंग के लिए एक एक प्रोडक्ट डिस्ट्रिक्ट प्रफुल्लित करना भी प्रस्तावित किया है।

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