जालंधर, जेएनएन। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत के एक दिन बाद ही पंजाब में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। वीरवार को जहां अकाली दल ने अमृतसर के राजा सांसी में रैली कर दमखम दिखाया, वहीं जालंधर में अकाली दल से अलग हुए अकाली दल टकसाली के नेताओं ने अगली रणनीति पर मंथन शूरू कर दिया है। रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा और सुखदेव सिंह ढींडसा के नेतृत्व में टकसाली नेताओं की एक बैठक मीटिंग जीटीबी नगर में गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा साहिब में जारी है। इस मौके पर संबोधित करते हुए रवि इंदर सिंह ने कहा कि रतन सिंह अजनाला और उनके पुत्र बोनी अमरजीत अजनाला ने आज पद और पैसे के लालच में शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया है।

इसमें गुरचरण सिंह चन्नी, जत्थेदार जैमल सिंह, प्रिंसिपल इंद्रजीत सिंह, हरजीत कौर तलवंडी, एमपी सिंह बिनाका, स्त्री अकाली दल की प्रधान सिमरजीत कौर और जत्थेदार अजीत सिंह सरूप सिंह ढेसी हिस्सा ले रहे हैं। सेवा सिंह सेखा भी बैठक में पहुंचे हैं।

जालंधर के गुरुद्वारा गुरु तेगबहादुर नगर में अकाली दल टकसाली की बैठक में मौजूद पूर्व सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा (पीली पगड़ी), उनके पास बैठे हैं रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा व अन्य।

जालंधरः गुरु तेग बहादुर नगर में जारी अकाली दल टकसाली की बैठक में उपस्थित वर्कर्स।

अजनाला पिता-पुत्र ने दिया टकसालियों को झटका

बता दें कि वीरवार को ही टकसाली नेताओं को एक बड़ा झटका लगा है। सुबह अमृतसर में अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल अचानक प्रमुख टकसाली नेता रतन सिंह अजनाला के घर पहुंच गए। कुछ देर मीटिंग के बाद उन्होंने रतन सिंह अजनाला और उनके बेटे पूर्व विधायक बोनी अमरपाल सिंह अजनाला के दोबारा अकाली दल में शामिल होने की घोषणा कर दी। अब देखना है कि अजनाला पिता-पुत्र के साथ छोड़ने पर दिग्गज टकसाली नेता सेवा सिंह सेखवां और रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा का क्या कहते हैं।

 

 

 

 

 

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