जालंधर [वंदना वालिया बाली]। इन दिनों दीपिका पादुकोण अभिनीत फिल्म 'छपाक' का इंतजार सिने प्रेमी बेसब्री से कर रहे हैं। एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की सच्ची कहानी से प्रेरित इस फिल्म का जालंधर कनेक्शन भी है। फिल्म में दीपिका की वकील का रोल अदा कर रही हैं मधुरजीत सरगी। 'अग्नीपथ', 'मंटो', 'समर 2007' जैसी हिंदी फिल्मों व कई पंजाबी फिल्मों में किरदार निभा चुकी सरगी 'केसरी', 'जट्ट एंड जूलियट' 'पंजाब 1984' जैसी फिल्में निर्देशित करने वाले जालंधर के अनुराग सिंह की पत्नी हैं।

सरगी 'एह जनम तुम्हारे लेखे' जैसी पंजाबी फिल्म बनाने वाले दूरदर्शन जालंधर के पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. हरजीत सिंह व 'पंजाब 1984' फिल्म की लोरी-तेनू मेरी उमर रब्बा ला देवे... सरीखे अनेक लोकप्रिय गीत लिखने वाली डॉ. तेजिंदर कौर की बेटी हैं। उन्होंने जालंधर के एपीजे स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की है। एचएमवी कालेज से उन्होंने सायकोलॉजी, वोकल म्यूजिक व इलेक्टिव इंगलिश में ग्रैजुएशन की है और जीएनडूयू के रीजनल कैंपस से अंग्र्रेजी में एमए हैं।

यूं मिला 'छपाक' में रोल

फिल्म 'छपाक' में अपने किरदार के बारे में सरगी बताती हैं कि 'अर्चना बजाज, नाम की वकील का यह रोल मानो मुझे बैठे बिठाए मिल गया। एक दिन मैं अनुराग व अपनी मां के साथ रेस्त्रां में लंच कर रही थी तो 'छपाक' के कास्टिंग डायरेक्टर गौतम किशन चंदानी के असिस्टेंट देश दीपक ने मुझे देखा और आकर पूछा कि क्या उक्त रोल के लिए मैैं आडिशन देना चाहूंगी? मेघना गुलजार की फिल्म के लिए भला 'ना' कैसे कह सकती थी। उन्होंने स्क्रिप्ट दी और एक सप्ताह के बाद आडिशन को बुलाया। उस एक सप्ताह में खूब रिसर्च व मेहनत की और ऑडिशन में मेरा चयन हो गया।

बहुत व्यवस्थित थी शूटिंग

दीपिका पादुकोण व मेघना गुलजार के साथ काम करने के अनुभव के बारे में सरगी बताती हैैं कि 'बहुत ही व्यवस्थित शूट रहा इस फिल्म का। मात्र 43 दिन में यह फिल्म पूरी हुई क्योंकि सभी समय के पाबंद व अनुशासित ढंग से काम करते रहे। दीपिका स्पेशल मेकअप के कारण सभी कलाकारों से पहले सेट पर पहुंच जाती थीं। उनके विनम्र स्वभाव ने कभी किसी अन्य कलाकार को ऐसा महसूस नहीं होने दिया कि वे सुपर स्टार हैं और बाकी किसी लिहाज से उनसे कमतर हैं। मेघना गुलजार और अतिका चौहान ने फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी हैं जो उन्हें दो महीने पहले मिल गई थी। यह इतनी स्पष्टता और सटीकता से लिखी गई थी कि शूटिंग के दौरान बहुत ही कम बदलाव इसमें किये गए।

दिमाग के तेजाब के निवारण का संदेश

फिल्म 'छपाक' का समाज पर कैसे प्रभाव की अपेक्षा की जा सकती है? इस बारे में सरगी कहती हैं कि 'इस फिल्म के बाद एसिड अटैक्स की गंभीरता को लोग समझेंगे और इसकी चर्चा बढ़ेगी। फिल्म केवल महिलाओं पर तेजाब से हमलों की बात नहीं करती है बल्कि इस जुर्म के अन्य आयाम भी हैं। पहले कानून में इस तरह के हमले के लिए कोई अलग सजा का प्रावधान नहीं था, लेकिन अब धारा 326बी के तहत इसकी गंभीरता को बयां किया गया है। फिल्म में लोगों के 'दिमाग में भरे एसिड के निवारण' यानी उनकी मानसिकता को बदलने का संदेश है। यह प्रेरक कहानी तेजाब की शिकार हुई युवती के पीड़ा से उभरने और मुश्किल परिस्थितियों पर उसकी जीत को दर्शाती है।

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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