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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 27, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

200 साल पहले भी बालाकोट में हुई थी कार्रवाई, महाराजा रणजीत सिंह की फौज ने किया था सफाया

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Wed, 27 Feb 2019 12:03 PM (IST)Updated: Thu, 28 Feb 2019 08:28 AM (IST)

वायुसेना द्वारा पाकिस्‍तान में की गई कार्रवाई और बालाकोट में जैश के ठिकाने को ध्‍वस्‍त किया गया था। 200 साल ...और पढ़ें

200 साल पहले भी बालाकोट में हुई थी कार्रवाई, महाराजा रणजीत सिंह की फौज ने किया था सफाया
200 साल पहले भी बालाकोट में हुई थी कार्रवाई, महाराजा रणजीत सिंह की फौज ने किया था सफाया

जालंधर, जेएनएन। भारतीय वायुसेना (IAF) द्वारा मंगलवार तड़के पाकिस्‍तान में की गई सर्जिकल स्‍ट्राइक (Surgical strike2) कार्रवाई के साथ ही बालाकोट सुर्खियों में आ गया है। सर्जिकल स्ट्राइक2 में भारतीय वायु सेना का निशाना बने पाकिस्तान के बालाकोट कस्बे पर हमले का ऐतिहासिक महत्व भी है। आंतकी संगठन जैश ए मोहम्‍मद का बड़ा अड्डा रहा बालाकोट पहले भी ऐसे तत्‍वों का ठिकाना रहा है। करीब 200 साल पहले महाराजा रणजीत सिंह की फौज ने बालाकोट से आतंकी तत्‍वों पर कार्रवाई कर उनका सफाया किया था।

दरअसल, दक्षिण एशिया में कथित जिहाद और 'जिहादियों' का पहला अड्डा बालाकोट था। यहीं पर महाराजा रणजीत सिंह की फौज ने वर्ष 1831 में सैयद अहमद शाह बरेलवी को मौत के घाट उतारकर पेशावर पर कब्जा किया था। उस समय शाह ने खुद को इमाम घोषित कर पहली बार वर्तमान समझ के मुताबिक 'जिहाद' शुरू की थी। शाह और उसके कथित जिहादी बालाकोट में 1824 से 1831 तक सक्रिय रहे थे।

इसका जिक्र पाकिस्तानी लेखिका आयशा जलाल ने अपनी पुस्तक 'पार्टिजंस ऑफ अल्लाह' में भी किया है। सैयद अहमद शाह बरेलवी का सपना भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लामिक राज्य स्थापित करना था। इसी उद्देश्य से उसने हजारों 'जिहादियों' को महाराजा रणजीत सिंह की फौज के खिलाफ एकत्र किया था। उसने खुद को इमाम घोषित कर रखा था। शाह ने महाराज की नाक में दम कर रखा था। यही कारण है कि महाराजा के पुत्र शेर की अगुआई में शाह के मारे जाने के बाद ही उन्होंने पेशावर को अपने राज्य में जोड़ा था।

तब अंग्रेजों ने दी थी 'जिहादियों' को शह

जैसे आज पाकिस्तान जिहादियों को भारत के खिलाफ शह दे रहा है, वैसे ही 160 साल पहले अंग्रेजों ने सैयद अहमद शाह को महाराजा रणजीत सिंह के खिलाफ शह दी थी। अंग्रेजों का मानना था कि वहाबी शाह और उसके साथी सिख राज को कमजोर करकेउन्हें फायदा पहुंचाएगा। उसे इस इलाके में 'जिहादी' गतिविधियों चलाने की पूरी छूट दी गई थी।

'जिहादियों' का बड़ा गढ़ था बालाकोट

सैयद अहमद शाह और उसके साथियों की कब्रें आज भी बालाकोट में मौजूद हैं। इन्हें बहुत पवित्र भी माना जाता है। वल्र्ड ट्रेड सेंटर में अलकायदा के हमले के बाद जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया तो आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को अपना ठिकाना वहां से शिफ्ट करना पड़ा। बालाकोट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए ही शायद जैश ने अपने आतंकवादियों के प्रशिक्षण के लिए यहां अपना प्रशिक्षण केंद्र खोला। यह केंद्र आम लोगों की पहुंच से दूर एक पहाड़ी की चोटी पर था, जिसे भारतीय वायुसेना ने हमला कर तहस-नहस कर दिया है।  

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