नीरज शर्मा, होशियारपुर

पशु पालकों के लिए वरदान साबित होने वाला वेटनरी अस्पताल खुद बुरी हालत से जूझ रहा है। बिल्डिंग दिन-प्रतिदिन खंडहर में तबदील हो रही है। छत व दीवारें कंडम हो चुकी हैं। अस्पताल प्रशासन की मानें तो विभाग के आला अधिकारियों को कई बार रिमाइंडर डाला गया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अस्पताल के चारों तरफ भांग बूटी उगी हुई है। यहां तक कि मरम्मत न होने के कारण रिहायशी कांप्लेक्स खाली हो चुका है। मात्र चार ही क्वार्टर बचे हैं, वह भी लगभग अपनी आयु पूरी कर चुके हैं। वहां पर क्लास फोर के कर्मचारी रह रहे हैं। 1987 में इमारत तैयार हुई थी। जब अस्पताल शुरू किया था तो डाक्टरों व स्टाफ के लिए रिहायशी क्वार्टर भी बनाए गए थे और हर सुविधा दी गई थी। वाटर सप्लाई के लिए अलग से टंकी तैयार करवाई गई थी, परंतु उसके बाद किसी ने इस परिसर की ओर ध्यान नहीं दिया। समय के साथ-साथ ईमारत खस्ता होती चली गई और अब दम तोड़ने के कगार पर है।

पूरे परिसर की वायरिग भी खराब

इमारत के साथ-साथ अस्पताल में बिजली से चलने वाले उपकरण भगवान भरोसे हैं, क्योंकि अंडरग्राउंड वायरिग खराब हो चुकी है। यदि पूरे अस्पताल की वायरिग बदली जाए तो लगभग 3.50 से चार लाख रुपये का खर्च है और विभाग इतना खर्च करने के लिए तैयार नहीं है। इस संबंधी एस्टीमेट हाईकमान को काफी देर पहले ही दे दिया गया है।

पलायन कर बचाई जान

धीरे-धीरे क्वार्टर खस्ता होने के चलते मुलाजिम पलायन कर गए और एक या दो क्वार्टर को छोड़कर बाकी सभी खाली हो चुके हैं और कभी भी गिर सकते हैं। जो क्वार्टर प्रयोग में हैं वह भी टूटने के कगार पर हैं।

सरकार की प्लानिंग के बारे में नहीं पता : डिप्टी डायरेक्टर

पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. हरजीत सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले ही यहां ज्वाइंन हुए हैं। इससे पहले अधिकारियों ने एस्टीमेट दिया है जो आलाकमान के पास है। लेकिन सरकार की क्या प्लानिग है, क्या बिल्डिंग नई बनेगी या फिर शिफ्ट होगी। इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।

Edited By: Jagran