संवाद सहयोगी, दातारपुर: धरती पर विचरण करने वाले जितने भी प्राणी हैं, उन सभी में मानव को एक विशेष मर्यादा दी है। शुक्रवार को बावा लाल दयाल आश्रम दातारपुर में संक्रांति के अवसर पर महंत रमेश दास ने जी प्रवचन किए।

उन्होंने कहा कि मानव वह इसलिए भी है क्योंकि ज्ञान, विवेक और बुद्धि केवल उसी में है। इस प्रकार के जितने भी गुण हैं, वह अन्य किसी और प्राणी को विधाता ने नहीं दिए। मानव भी अपने किए कर्मो के अनुसार ही बना है।

महंत रमेश दास ने कहा कि इसी मानवता के आधार पर हम सभी का नाम मानव पड़ा। सारे कर्तव्यों का दायित्व मानव पर ही है। अगर कोई उन कर्तव्यों का जान, समझकर पालन करता है तभी वह मानव कहला सकता है। अगर कोई उन कर्तव्यों का पालन नहीं करता है तो वह कभी भी मानव कहलाने का अधिकारी नहीं बन सकता।

इस अवसर पर ओंकार नाथ, अशोक गुलाटी, तरसेम लाल, शीला, सरोजिनी, मंजू, शशि बाला, शक्ति सिंह, सुरिदर कुमार, जनक राज, गोपाल शर्मा, चंचला, वंदना, अविनाश कुमार, सरिता, सरोज बाला, संगीता, प्रेम लता, ममता, ऋतु बाला आदि उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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