संवाद सहयोगी, होशियारपुर : मनरेगा कर्मचारी यूनियन की तरफ से मुलाजिमों का धरना चौथे दिन भी जारी रहा। इस दौरान ब्लॉक के समूह मुलाजिम पंजाब सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ सड़कों पर उतरे। जिले के सभी पंच और सरपंचों ने जमकर नारेबाजी की। मनरेगा मुलाजिमों का कहना कि उन्होंने अपना केस रेगुलर करने के लिए विभाग को भेजा गया था। उस समय सर्व शिक्षा अभियान और रमसा के अध्यापक सरकार ने अपनी पॉलिसी बनाकर रेगुलर कर दिए थे, पर मनरेगा मुलाजिमों का केस दूसरी बार वापस भेज दिया गया। उस दिन से पूरे पंजाब से मनरेगा मुलाजिम के बीच गहरा रोष पाया जा रहा है। पूरे जिले के 1777 गांव में चल रहे विकास के सभी काम बंद कर 21 अगस्त से फैसले के मुताबिक 1539 मुलाजिम 16 सितंबर से लगातार धरने पर बैठ गए। मनरेगा जिला प्रधान वरिदर सिंह ने बताया कि कम वेतन पर पिछले 10 से 12 साल से ड्यूटी कर रहे मनरेगा मुलाजिमों को अफसरशाही नौकरी से निकालने की धमकियां दे रहे हैं। उनसे चार गुणा ज्यादा काम ले रहे हैं। उनको जो तनख्वाह मिलती है, वह भी समय के ऊपर नहीं मिलती और इसके अलावा भी उनको और कोई फंड भी नहीं मिल रहा। बीमारी दुर्घटना या मौत होने के बाद ही परिवार वालों को कोई भी आर्थिक सहायता नहीं दी जाती। मनरेगा स्कीम के चलते कुछ गांवों के सरपंचों को सम्मानित किया गया। मनरेगा के ऊपर एक किताब भी लिखी गई। जिसके बीच किसी भी मुलाजिम का कोई जिक्र तक नहीं किया गया। वहां पर मौजूद लखविदर सिंह एपीओ, संदीप, गौतम, प्रिस, चरणजीत सिंह, दविदर सिंह, सुरेंद्र कौर, सुरिदरजीत कौर, मोनिका, ब्लॉक समिति का स्टाफ उपस्थित थे। प्रदर्शन की सरकार होगी जिम्मेदार : वृंदा सिंह

वृंदा सिंह ने कहा कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो पूरे पंजाब और जिला के गांव के सरपंच मनरेगा मजदूर और भारतीय जत्थेबंदियों को साथ लेकर जबरदस्त प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने मांग की कि सरकार मुलाजिमों को अध्यापकों की तरह ही रेगुलर करें मनरेगा मुलाजिमों को जो वेतन मिलता है। वह सीधी सेंटर गवर्नमेंट से आती है। इससे पंजाब सरकार के खजाने में कोई भी फर्क नहीं पड़ेगा।

Posted By: Jagran

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