'आपका बेटा अस्पताल में है...' एक कॉल से घबराई मां, साइबर ठगों ने ममता का फायदा उठा उड़ाए 3 लाख रुपये
होशियारपुर में साइबर ठगों ने बेटे के एक्सीडेंट का झांसा देकर महिला से तीन लाख रुपये ठग लिए। बाद में बेटे से बात करने पर ठगी का पता चला।

ये AI जनरेटेड प्रतिकात्मक तस्वीर है।
HighLights
होशियारपुर में बेटे के एक्सीडेंट का झांसा देकर ठगी।
साइबर ठगों ने व्हाट्सऐप कॉल से 3 लाख रुपये ठगे।
पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
हजारी लाल, होशियारपुर। साइबर ठगों ने लोगों को ठगने के लिए अब रिश्तों और भावनाओं का सहारा लेना शुरू कर दिया है। ऐसा ही एक मामला होशियारपुर में सामने आया है, जहां एक महिला को उसके बेटे के एक्सीडेंट का झांसा देकर साइबर ठगों ने 3 लाख रुपये ठग लिए। आरोपित ने महिला को व्हाट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क किया और बेटे के दुर्घटना में घायल होने की बात कहकर इलाज के लिए तत्काल पैसों की जरूरत बताई।
महिला ने आरोपी की बात पर विश्वास कर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में बेटे से बात करने पर उसे पता चला कि उसके बेटे का कोई एक्सीडेंट हुआ ही नहीं था। मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम थाना होशियारपुर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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बेटे के एक्सीडेंट का दिया हवाला
पुलिस को दी शिकायत में दलजीत कौर पत्नी महिंदर पाल, निवासी गांव पिपलांवाला, थाना मॉडल टाउन, होशियारपुर ने बताया कि 7 सितंबर को उसके पास व्हाट्सऐप कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उसके बेटे के एक्सीडेंट का हवाला देते हुए कहा कि उसे इलाज के लिए तुरंत पैसों की जरूरत है। आरोपी ने इस तरह बात की कि महिला को लगा कि उसका बेटा किसी परेशानी में है।
अलग-अलग खातों में पैसे किए ट्रांसफर
घबराई महिला ने बिना पूरी तरह पुष्टि किए आरोपी द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 3,00,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद जब महिला ने अपने बेटे से संपर्क किया तो उसने बताया कि उसका कोई एक्सीडेंट नहीं हुआ है। इसके बाद महिला को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी है।
पीड़िता की ओर से इस संबंध में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस की जांच के दौरान व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से 3 लाख रुपये की ठगी किए जाने की बात सामने आने के बाद मामला दर्ज किया गया।
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सावधान रहें, किसी के झांसे में न आएं
साइबर ठगी के इस तरीके में ठग पहले फोन या व्हाट्सऐप के जरिए किसी व्यक्ति के परिजन की दुर्घटना या किसी अन्य आपात स्थिति की झूठी जानकारी देते हैं। इसके बाद पीड़ित को भावनात्मक रूप से दबाव में लेकर तत्काल पैसे भेजने के लिए कहा जाता है। जल्दबाजी और घबराहट में लोग बिना पुष्टि किए रकम ट्रांसफर कर देते हैं, तो सावधान रहें-
- घबराएं नहीं, पहले पुष्टि करें: अगर कोई फोन पर किसी परिजन के एक्सीडेंट या मुसीबत में होने की बात कहे तो तुरंत पैसे भेजने के बजाय संबंधित व्यक्ति को सीधे फोन करके स्थिति की पुष्टि करें।
- वीडियो कॉल से करें पहचान: संदिग्ध कॉल आने पर परिजन से वीडियो कॉल पर बात करने की कोशिश करें। केवल फोन पर किसी की आवाज सुनकर भरोसा न करें।
- किसी अनजान खाते में पैसे न भेजें: इमरजेंसी के नाम पर बताए गए किसी अनजान बैंक खाते, यूपीआई या वॉलेट में रकम ट्रांसफर करने से पहले पूरी जानकारी की जांच करें।
- निजी जानकारी साझा न करें: ओटीपी, एटीएम/डेबिट कार्ड की जानकारी, बैंक डिटेल, यूपीआई पिन या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
- व्हाट्सएप कॉल पर भी सतर्क रहें: अनजान नंबर से आने वाली व्हाट्सऐप कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। ठग अक्सर डर और जल्दबाजी का माहौल बनाकर निर्णय लेने के लिए मजबूर करते हैं।
- ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें: अगर गलती से पैसे ट्रांसफर हो जाएं तो देरी किए बिना बैंक को सूचना दें और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराएं। समय पर सूचना देने से रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना बढ़ सकती है।
- याद रखें: घबराहट में लिया गया फैसला साइबर ठगों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकता है। किसी भी आपात स्थिति में पहले पुष्टि करें, फिर भुगतान करें।
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