डल्लेवाल हाउस अरेस्ट, किसान नेताओं पर भी हुई कार्रवाई; पंचायत से पहले पंजाब में बढ़ा सियासी तनाव
फरीदकोट में किसान पंचायत से पहले पुलिस ने जगजीत सिंह डल्लेवाल को घर में नजरबंद कर दिया। कई पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की सूचना है। किसान संगठन ने विरोध जताया।

घर में नजरबंद किए गए किसान नेता।
HighLights
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल फरीदकोट में हाउस अरेस्ट।
किसान पंचायत से पहले कई अन्य नेता भी नजरबंद किए गए।
किसानों की मांगें, लैंड मोरगेज बैंकों में ओटीएस लागू हो।
जागरण संवाददाता, फरीदकोट। भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर की ओर से बुधवार को फरीदकोट में होने वाली किसान पंचायत से पहले पुलिस ने संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल को हाउस अरेस्ट कर लिया। इसके अलावा फरीदकोट समेत आसपास के जिलों में संगठन के कई पदाधिकारियों को भी उनके घरों में नजरबंद किए जाने की सूचना है।
पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों के लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से किसानों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। किसान अपनी मांगों को लेकर हर हाल में संघर्ष जारी रखेंगे। जरूरत पड़ी तो भूख हड़ताल से लेकर आमरण अनशन तक का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
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किसानों को हिरासत में लेते हुए पुलिस।
पांच माह से 12 जिलों में चल रहे धरने
किसानों की ओर से पिछले करीब पांच माह से फरीदकोट समेत पंजाब के 12 जिलों में लैंड मोरगेज बैंकों के बाहर धरने दिए जा रहे हैं। किसानों की प्रमुख मांग है कि कमर्शियल बैंकों की तर्ज पर लैंड मोरगेज बैंकों में भी ओटीएस (वन टाइम सेटलमेंट) योजना लागू की जाए।
इसके साथ ही किसानों से लिए गए खाली चेक वापस करने और शंभू-कनौरी बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान किसानों के सामान की हुई चोरी की भरपाई करने की मांग की जा रही है।
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29 अगस्त के प्रदर्शन से पहले भी हुई थी कार्रवाई
इन मांगों को लेकर 29 अगस्त को फरीदकोट में प्रस्तावित प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन से पहले भी पुलिस ने कई किसानों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था। इसके विरोध में संगठन की ओर से जेल भरो आंदोलन शुरू किया गया था।
इसी कड़ी में बुधवार, 9 सितंबर को फरीदकोट में किसान पंचायत आयोजित की जानी थी। पंचायत में किसानों की मांगों को लेकर संघर्ष की अगली रणनीति तैयार की जानी थी। पंचायत से पहले हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर किसान संगठन और सरकार के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं।
