संवाद सहयोगी, माहिलपुर : करीब साढ़े 6 वर्ष पहले 26 अक्तूबर 2010 के रोटी रोजी कमाने गए कस्बा माहिलपुर के युवक की दुबई में ब्लड मनी देकर जेल से छूटने की सूचना के कारण उसके परिजनों ने सुख की सांस ली। माहिलपुर के वार्ड नंबर छह के निवासी बनारसी दास ने बताया कि उसका बेटा दल¨वदर ¨सह (30) जोकि आज से करीब साढ़े वर्ष पहले दसवीं पास करने के बाद घर की गरीबी दूर करने के लिए गढ़शंकर के गांव समुंदड़ा निवासी एक एजेंट से कर्ज लेकर 26 अक्तूबर 2010 को घर से दुबई गया था। यहां पहुंचने के बाद दल¨वदर ने काफी मेहनत की। काफी पैसे भी कमाए पर दुर्भाग्य से वह वर्ष 2012 में भारत के 14 अन्य लोगों के साथ दुबई में ही शराब तस्करी के आरोप में पुलिस ने काबू कर लिया। इससे उनके होश ही उड़ गए। उन्हें लगा था कि शराब की तस्करी में करीब 5-7 माह की सजा काट वापस भारत आ जाएगा। शारजाह पुलिस ने उस मौके पकड़े 15 लोगों में से 11 लोगों तो बरी कर दिया पर दल¨वदर सहित पांच लोगों पर उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के युवक रा¨जदर कुमार चौहान के कत्ल का दोषी मान लिया।

इसके बाद पूरा परिवार भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के इनको छुड़ाने के लिये गुहार लगाता रहा पर कोई भी फायदा नहीं हुआ। जब कोई बात न बनती देख परिवार दुबई के कारोबारी एसपी ओबराय से मिला और अपनी सहायता करने की मांग की तो उसने बीच आकर बातचीत की तो मामले का हल हुआ। सोमवार को दुबई की अदालत ने पांच वर्ष बाद इस मामले में ब्लड मनी के तौर पर मृतक युवक के परिवार को 20 लाख रुपये बतौर ब्लड मनी देकर राजीनामा का फैसला सुनाया। ोर्ट में युवक के वकील से एफिडेविट लेकर केस की अगली सुनवाई की तारीख 20 अप्रैल तय की है। इस तरह दुबई में फंसे युवक दल¨वदर ¨सह के जेल से छूटने का रास्ता थोड़ा साफ हुआ है और पीड़ित युवक के परिजनों ने सुख की सांस ली है। दल¨वदर मां कश्मीर कौर ने कहा कि वह तो उस दिन के इंतजार में है जब उसका बेटा सही सलामत वापिस भारत आ जाएगा।

Posted By: Jagran

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