बाल कृष्ण कालिया गुरदासपुर

सरकारों की ओर से नशे के खिलाफ अभियान चलाए जाने के बाद भी नशा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। किसी ना किसी रूप में नशा युवा युवा पीढ़ी को खोखला कर रहा है। चाहे वह शराब का नशा हो या फिर हेरोइन का। बुधवार को ट्रक यूनियन व बस स्टैंड दो जगह पर आरटीए आफिस व ट्रैफिक पुलिस ने मिलकर नशे के खिलाफ सेमिनार का आयोजन किया। इस दौरान वहां पर लोगों को भी बोलने का मौका दिया गया। इस दौरान मंच पर जिले के गांव शाहपुर के मलकीत सिंह की आंखें अपने घर की दास्तां सुनाते- सुनाते नम हो गई।

मलकीत सिंह का कहना था कि उसका बेटा हेरोइन का नशा करता था। नशे की लत छुड़ाने के लिए उसे नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवाया गया, लेकिन वहां से मिलने वाली दवाई की लत भी ऐसी लगी कि उसका बेटा चल बसा। उसने अपने पीछे दो बच्चों को छोड़ दिया। इसके बाद बहू भी सदमे में रहने लगी और अपने पति के जाने का सदमा सहन नहीं करते हुए वह भी इस दुनिया से अलविदा कर गई। इस कारण उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट आया। उसने नम आंखों से लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करते हुए कहा कि नशा एक अभिशाप है, जो आपके परिवार को धीरे-धीरे खा जाता है। इससे अपने बच्चों को बचाने के लिए जल्द से जल्द उपाय करें नहीं तो आपके परिवार का पतन तय है।

मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी भी मलकीत मसीह की इस आपबीती को सुनकर दंग रह गए। ट्रैफिक इंचार्ज अजय शर्मा, ट्रैफिक एजुकेशन सेल के संजीव कुमार, आरटीओ आफिस से महिला कर्मचारी कांता देवी, दीपक शर्मा, राकेश कुमार, अनिल कुमार भी मौके पर मौजूद थे। इस दौरान ट्रक यूनियन के सदस्यों ने नशा नहीं करने की सौगंध खाई। हर साल हो रहे नशे की वजह से हादसे : संजीव कुमार

ट्रैफिक एजुकेशन सेल के एएसआइ संजीव कुमार ने सभी ट्रक यूनियन व बस स्टैंड में दोनों जगह पर लगे सेमिनार में बताया कि हर साल 300 से ज्यादा जिदगी में सड़क हादसे में खत्म हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि नशा करके गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति ओवरस्पीड गाड़ी चलाता है। इससे सड़क हादसा होता है। इन हादसों की वजह से किसी की टांग टूट जाती है तो कोई मौत के मुंह में चला जाता है। उन्होंने सभी मौजूद लोगों को नशे के खिलाफ शपथ भी दिलाई।

Edited By: Jagran