विनय कोछड़, बटाला

शहर का एकमात्र सरकारी सिविल अस्पताल में इन दिनों दवाइयों का टोटा चल रहा है। केवल जहां पर दवाइयों का 25 फीसदी कोटा ही उपलब्ध है, जिस कारण मरीज खासे परेशान हो रहे हैं। मजबूरन उन्हें बाजार से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। उधर, सीनियर मेडिकल अधिकारी संजीव भल्ला ने कहा कि वे कई बार अपने हेडऑफिस को लिख चुके हैं। इस बारे में कोई सुनता नहीं। स्थानीय सिविल अस्पताल के रिकार्ड मुताबिक प्रतिदिन जहां पर मरीजों की ओपीडी साढ़े पांच सौ के करीब है, जिन्हें अटैंड करने 10-15 डाक्टरों की टीम है। अवैरजन हर डाक्टर के पास 50 के करीब मरीज अपना ईलाज करवाने के लिए दूर-दूर से पहुंचते है। सुबह नौ बजे सिविल अस्पताल की ओपीडी शुरूहो जाती है। लंबी-लंबी लाईनों में मरीज अपनी बारी का इंतजार करते है, जब डाक्टर के पास चेकअप करवाने की बारी आती है तो डाक्टर जिन दवाइयों को उनकी पर्ची पर लिखते है। वे तकरीबन बाहर से लिखी होती हैं। मरीजों की शिकायत रहती है कि डाक्टर जानबूझ कर महंगी दवाईयां लिखकर देते है, क्यों कि उनकी दवाई बनाने वाली कंपनी के साथ कमीशन की से¨टग है। उन्होंने डाक्टरों पर आरोप लगाते कहा कि वे उन्हें जैनिरक दवाईयां क्यों नही लिखकर देते है। बताया जाता है कि जैनिरक दवाईयों की कीमत अन्य कंपनी की दवाइयों से कम दाम पर मार्कीट में उपलब्ध हो जाती है। फिर भी डाक्टर जानबूझकर कंपनी की महंगी दवाईयां मरीजों को लिखकर उन्हें खरीदने के लिए मजबूर करते है, जिसे गरीब मरीजों के लिए खरीद पाना मुश्किल हो जाता है। वैसे भी सरकारी अस्पताल के डाक्टरों पर बाजार की दवाईयां लिखने के कई बार मरीजों द्वारा आरोप लगाए जाते रहे है, इसके लिए सीनियर मेडिकल अधिकारी संजीव भल्ला ने खुद माना कि वे इस बाबत डाक्टरों को फटकार लगा चुके है। उन्हें चेतावनी दें चुके है कि अगर कोई डाक्टर बाजार की महंगी दवाई लिखता पाया गया तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। दवाइयों की कमी के पीछे सरकारी नीति

बटाला। विशेषज्ञों की मानें तो वे सिविल अस्पताल में दवाईयों की कमी के पीछे सरकारी नीति को जिम्मेदार ठहराते है। उनका कहना है कि पिछली सरकार के कार्यकाल दौरान अस्पताल में दवाईयां की कमी नही रही। हर मरीज को लगभग अस्पताल से दवाईयां मिल जाती रही है, लेकिन नई कांग्रेस सरकार ने अस्पताल में मिलने वाली दवाईयों का कोटा कम कर दिया है, जितनी दवाईयां आती है, वे जल्द ही मरीजों में बाट दी जाती है। उसके बाद अगली डिलीवरी को कई माह बीत जाते है, जिसके लिए मरीजों को परेशानियां झेलनी पड़ती है। परेशान मरीजों ने सरकार पर आरोप लगाते कहा कि हर सरकार का मूल रुप से डयूटी होती है कि वे लोगों को सेहत संबंधी पूरी सुविधाएं दे, लेकिन सरकार ने सरकारी अस्पतालों में दवाईयों की उपलब्धता न करवा लोगों साथ किए वायदे से पीछे हट रही है। केवल एंटीबायोटिक मेडीसन उपलब्ध

बटाला। सिविल अस्पताल में केवल एंटीबायोटिक मेडिसन का कोटा ही मौजूद है, जिनमें बीपी,शूगर,बुखार, एनर्जी की दवाईयां शामिल है। इसके अलावा जरूरी दवाइयां वे सब मरीजों को मार्कीट से खरीदनी पड़ती है। शेष दवाइयां जिन्हें डाक्टरों द्वारा सरकारी पर्ची पर लिखी जाती है। वे काफी मंहगे दाम पर बाजार से मिलती है।

पंजाब में तीन सेंटर जहां से सप्लाई होती है दवाइयां

पंजाब के सरकारी अस्पतालों को सप्लाई करने के लिए पंजाब में तीन सेंटर बनाए गए है, जिनमें वेरका , मोहाली, ब¨ठडा है। वेरका से अमृतसर,तरनतारन,गुरदासपुर,पठानकोट व उसके आसपास के जितने सरकारी अस्पताल है, वहां पर दवाईयां सप्लाई करता है। इसके अलावा मोहाली से रुपनगर,जालंधर,शहीद भगत ¨सह नगर, होशियारपुर, व उसके आसपास जितने शहर व गांव में सरकारी अस्पताल, सीएचसी केंद्र को दवाईयां सप्लाई की जाती है। ब¨ठडा से लुधियाना, फिरोजपुर, मोगा, अबहोर, फरीदकोट, संगरुर के क्षेत्रों में सरकारी अस्पताल में दवाईयों की सफ्लाई की जाती है। बता दें कि अब इन सेंटरों से लंबे से दवाईयों की सप्लाई सरकारी अस्पतालों में कम तादाद में पहुंच रही है।

Posted By: Jagran