गुरदासपुर/ पठानकोट, जेएनएन। भाजपा Lok Sabha Election 2019 में गुरदासपुर सीट से जीत दर्ज कर सियासी करियर की शुरूआत करने वाले बॉलीवुड स्‍टार सनी देयाेल बेहद खुश है। चुनाव जीतने के बाद शुक्रवार को वह जनती के बीच 'गदर' वाले स्‍टाइल में लोगों के बीच पहुंचे। उनका शुक्रवार को ट्रक की छत पर बैठक कर विजय जुलूस निकला। लोगों के शानदार स्‍वागत और जीत से गदगद सनी देयोल ने कहा कि जनता के प्‍यार से ढ़ाई किलो का हाथ अब और भारी हो गया है।

शुक्रवार को गुरदासपुर लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाले पठानकाेट में सनी देओल ट्रेन विजय जुलूस निकाला। इसमें पूर्व मंत्री मास्‍टर मोहनलाल सहित भाजपा के वरिष्‍ठ नेताओं के साथ काफी संख्‍या में पार्टी के कार्यकर्ता शामिल हुए। सनी विजय जुलूस में ट्रक पर बैठे हुए थे और लोगों का अभिवादन स्‍वीकार कर रहे थे।

लोगों ने सनी देयोल का जगह-जगह स्‍वागत किया। सनी ने कहा, बहुत खुश हूं। जनता का प्‍यार और समर्थन के लिए बेहद शुक्रिया। जनता ने ढाई किलो के हाथ को और भारी कर दिया है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में लोगों के समर्थन से खुश हूं।

उन्होंने कहा, 'जो मेरे साथ जुड़े हैं उनका आभार और जो नहीं जुड़े उन्हें मैं काम से अपने साथ जोड़ूंगा। गुरदासपुर के लोगों ने मुझ पर जो विश्वास दिखाया है, मैं उसे कभी भी टूटने नहीं दूंगा। हलके के विकास के लिए एक टीम को साथ लाकर एस्टीमेट व प्लान तैयार किया जाएगा। देश में मोदी लहर से मैं बहुत खुश हूं। उनका दोबारा प्रधानमंत्री बनना बहुत जरूरी था। मैं जिस काम में जुट जाता हूं, उसे पूरा करके ही दम लेता हूं। गलती को सुधारने का प्रयास करता हूं। जनता के प्यार ने मेरे ढाई के किलो के हाथ को और भी भारी कर दिया है।'

बता दें कि गुरदासपुर लोकसभा क्षेत्र में सनी का ढाई किलो का हाथ कांग्रेस पर भारी पड़ा है। सनी देयोल ने  पंजाब कांग्रेस के अध्‍यक्ष सुनील जाखड़ को 82459 मतों से हराया है। इस सीट से जीत दर्ज कर बॉलीवुड स्‍टार सनी देओल अपने सियासी करियर की विजयी शुरुआत की है।

पठानकोट में सनी देयोल विजय जुलूस में।

सनी देओल की इस जीत से भाजपा ने अपने गढ़ पर फिर कब्‍जा कर लिया। इसके साथ ही सनी ने मरहूम विनोद खन्ना की गुरदासपुर की विरासत को संभाल लिया है। सनी लोकसभा चुनाव के समय ही भाजपा में शामिल हुए थे और पार्टी ने उनको गुरदासपुर से प्रत्‍याशी बनाया था।बॉर्डर और गदर जैसी फिल्‍मों के ज‍रिये युवाओं में लोकप्रिय सनी देओल राजनीति में एकदम नए खिलाड़ी हैं।

गुरदासपुर में चुनाव के दौरान सनी देओल के पिता धर्मेंद्र भी प्रचार के लिए पहुंचे थे। चुनाव प्रचार में सनी देओल ने साफ कहा कि मुझे राजनीति नहीं आती, लेकिन लोगों का दुख-दर्द पता है। उसे दूर करूंगा। माना जाता है सनी के स्‍टारडम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हवा के संग यह बात भी लोगों पर असर कर गई।

दूसरी ओर, पंजाब के सबसे हाॅट सीट माने जाने वाले गुरदासपुर में सुनील जाखड़ के पीछे रहने से कांग्रेस को राज्‍य में बड़ा धक्‍का लगा है। जाखड़ सनी देओल के स्टारडम को तोड़ नहीं पाए। कांग्रेस के लिए यह इसलिए भी परेशानी वाली है कि गुरदासपुर लोकसभा सीट के तहत आते नौ विधानसभा क्षेत्रों में से कांग्रेस का सात पर 7 कब्‍जा है। इनमें से तीन कैबिनेट मंत्री हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रधान व राज्य सभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा का भी यह गृह नगर है। विनोद खन्ना का स्वर्गवास होने के बाद 2017 में हुए उप चुनाव में सुनील जाखड़ ने 1.93 लाख वोटों से जीत कर भाजपा से यह सीट छीनी थी।

गुरदासपुर सीट से सनी देओल के चुनाव मैदान में आने के साथ ही यह सीट पूरे देश में सर्वाधिक चर्चा का केंद्र बन गई थी। कांग्रेस के सामने इस सीट पर दो सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियां थी। एक तो  भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही थी, जबकि फिल्मों में सनी देओल की छवि भी बहादुर व राष्ट्रवादी की है। अंत तक कांग्रेस सनी देओल की इस छवि को तोड़ नहीं पाई। शर्मीले स्वभाव के सनी देओल ने पूरे चुनाव में न सिर्फ अपनी बात को रखा साथ ही उन्होंने जाखड़ पर कोई भी व्यक्तिगत हमला नहीं किया। कमोबेश जाखड़ ने भी पूरे चुनाव के दौरान सनी देओल पर कोई सीधा हमला नहीं किया।

सनी देओल की जीत इस लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1998 में भाजपा ने जो प्रयोग किया था वही प्रयोग 2019 में भी दोहराया और जिसमें पार्टी की सफलता मिली। 1998 में भाजपा ने कांग्रेस की कद्दावर नेता सुखवंश कौर भिंडर के खिलाफ फिल्म स्टार विनोद खन्ना को चुनाव मैदान में उतारा था। विनोद खन्ना महज 6,823 वोटों से इस सीट को जीतने में कामयाब रहे थे। जिसके बाद विनोद खन्ना चार बार गुरदासपुर से जीत कर सांसद बने। विनोद खन्ना की इसी विरासत को अब सनी देओल ने संभाल लिया है।

पूर्व स्पीकर स्वर्गीय बलराम जाखड़ के पुत्र सुनील जाखड़ अपने राजनीतिक करियर का तीसरा लोक सभा चुनाव हारे हैं। इससे पहले वह 1996 में फिरोजपुर से बहुजन समाज पार्टी के मोहन सिंह फलियांवाला से हार गए थे। 2014 में जब पूरे देश में मोदी की लहर चल रही थी तब राहुल गांधी ने पंजाब में सभी कद्दावर नेता को चुनाव मैदान में उतार दिया था। विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष रहने वाले जाखड़ फिरोजपुर से शेर सिंह घुबाया से चुनाव हार गए थे।

2017 के विधान सभा चुनाव में जब पंजाब में कांग्रेस की लहर थी और कांग्रेस 117 सीटों में से 77 सीटों पर जीती, इसके बावजूद जाखड़ अबोहर से चुनाव हार गए। हालांकि, बाद में विनोद खन्ना के निधन के बाद गुरदासपुर के उपचुनाव में जाखड़ ने भारी मतों से जीत हासिल की थी।  

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Posted By: Sunil Kumar Jha