गुरदासपुर, [सुनील थानेवालिया]। हम आज देश का स्‍वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और पूरे पंजाब मेें स्‍वतंत्रता दिवस की धूम है। ऐसे में इतिहास के पन्‍नों में बहुत से रोचक तथ्‍य सामने आते हैं। पंजाब का सबसे संवेदनशील जिला गुरदासपुर और पठानकोट देश से एक दिन पहले 14 अगस्त को ही आजाद हो गया था। दो दिन बाद इसे भारत में शामिल किया गया। दरअसल बंटवारे में गुरदासपुर पाकिस्तान में शामिल कर दिए गया था। उस वक्त पठानकोट भी गुरदासपुर जिले की ही तहसील हुआ करता था। पाकिस्तान ने गुरदासपुर का चार्ज लेने के लिए अपने डीसी और एसपी भी रवाना कर दिए थे। यह दो दिन तक गुरदासपुर पाकिस्तान का हिस्सा रहा।

बंटवारे के बाद 14 अगस्त 1947 को गुरदासपुर जिला बनाया था पाकिस्तान का हिस्सा

15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने के बाद 16 अगस्त को जिला गुरदासपुर की चार तहसीलों में एक शकरगढ़ को पाकिस्तान में रखा गया और पठानकोट तहसील (मौजूदा समय में जिला) सहित बाकी हिस्सा भारत में घोषित किया गया। इसे 17 अगस्त को सार्वजनिक किया गया।

इस फैसले के बाद जिला गुरदासपुर में मौजूद मुस्लिम बिरादरी को सुरक्षित पाकिस्तान पहुंचाने के लिए गांव पनियाड़ में रिफ्यूजी कैंप लगाया गया था। इस कैंप में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु भी पहुंचे थे। यह कैंप दो महीने तक संचालित किया गया।

17 अगस्त को शकरगढ़ तहसील को छोड़ गुरदासपुर, पठानकोट व बटाला तहसील भारत में किए थे शामिल

1947 में भारत-पाक बंटवारे के दौरान पंजाब के बंटवारे के लिए रैडक्लिफ कमीशन बनाया गया जिसका अध्यक्ष ब्रिटिश बैरिस्टर सिरिल रैडक्लिफ को बनाया गया। उन्होंने बंटवारे के लिए 1941 में हुई जनगणना को आधार बनाया। उस वक्त जिला गुरदासपुर में 56.4 फीसद मुस्लिम आबादी थी। ऐसे में गुरदासपुर को पाकिस्तान का हिस्सा बनाया गया। उस समय गुरदासपुर में चार तहसील गुरदासपुर, बटाला, पठानकोट और शकरगढ़ शामिल थीं। शकरगढ़ तहसील रावी दरिया के पार पाकिस्तान की ओर थी।

पाकिस्तान ने अपने डीसी व एसपी भेज दिए थे गुरदासपुर का चार्ज लेने

इतिहासकार प्रो. राज कुमार शमर कहते हैं कि गुरदासपुर को पाकिस्तान का हिस्सा बनाए जाने की संभावनाओं को देखते हुए शहर के अमीर परिवारों ने बच्चों, महिलाओं और कीमती सामान को ब्यास दरिया के पार भारत की सीमा में भेजना शुरू कर दिया था। 14 अगस्त को पाकिस्तान ने अपने डीसी और एसपी को चार्ज लेने के लिए गुरदासपुर भेज दिया था। अगर 1947 में गुरदासपुर पाकिस्तान का हिस्सा ही रहता तो भारत के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाती। भारत के पास श्रीनगर के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं बचता चूंकि उस वक्त पठानकोट भी गुरदासपुर जिले की ही तहसील थी।

Posted By: Sunil Kumar Jha